णमो अरिहन्ताणम् — हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः — प्रश्नोत्तर
१. एकपदेन उत्तराणि
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| (क) | ऋषभेण निर्मितस्य नगरस्य नाम किम्? | विनिता |
| (ख) | ऋषभस्य प्रसिद्धे द्वे कन्ये के? | ब्राह्मी, सुन्दरी |
| (ग) | कस्यां लिप्यां नैकानि शास्त्राणि लिपिबद्धानि? | ब्राह्मीलिप्याम् |
| (घ) | विनिता नामकं राज्यं ऋषभः कस्मै समर्पितवान्? | भरताय |
| (ङ) | ऋषभः बाहुबलिने किं राज्यं प्रदत्तवान्? | तक्षशिलाम् |
| (च) | प्रजाः भिक्षायां कानि वस्तूनि यच्छन्ति स्म? | आभरणानि, अनर्घवस्तूनि |
२. पूर्णवाक्येन उत्तराणि
(क) देशे काः समस्याः सन्ति इति ऋषभदेवस्य कल्पना प्राप्ता? जनानाम् आलस्यं, कृषिकार्ये न्यूनता, प्रजासु उत्पादनक्षमतायाः अभावः चेत्येताः मूलसमस्याः सन्ति इति कल्पना प्राप्ता।
(हिन्दी: लोगों का आलस्य, कृषि-कार्य में कमी और प्रजा में उत्पादन-क्षमता का अभाव — ये मूल समस्याएँ हैं, ऐसी समझ ऋषभदेव को प्राप्त हुई।)
(ख) महाराजः केषु कार्येषु प्रजाः प्रशिक्षितवान्? कृषिकार्ये, भोजननिर्माणे, वस्त्रनिर्माणे, पशुपालने, गृहनिर्माणे, नगरनिर्माणे च प्रजाः प्रशिक्षितवान्।
(हिन्दी: महाराज ने प्रजा को कृषि-कार्य, भोजन-निर्माण, वस्त्र-निर्माण, पशुपालन, गृह-निर्माण और नगर-निर्माण में प्रशिक्षित किया।)
(ग) ऋषभदेवस्य जीवनपरिवर्तिनी घटना का आसीत्? राजप्रासादे नृत्यकलाप्रदर्शनकाले काचित् नर्तकी नृत्यं कुर्वती सहसा भूमौ पतित्वा मृता — इयमेव घटना तस्य जीवनं परिवर्तितवती।
(हिन्दी: राजमहल में नृत्य-प्रदर्शन के समय किसी नर्तकी का नृत्य करते हुए अचानक गिरकर मर जाना — यही घटना ऋषभदेव का जीवन बदलने वाली थी।)
(घ) ऋषभदेवस्य दीर्घकालिकस्य उपवासस्य समाप्तिः कथम् अभवत्? तस्य प्रपौत्रेण श्रेयांसेन दत्तेन इक्षुरसेन उपवासस्य समाप्तिः अभवत्।
(हिन्दी: उनके प्रपौत्र श्रेयांस द्वारा दिए गए गन्ने के रस से उनका उपवास समाप्त हुआ।)
(ङ) ऋषभदेवः कदा कुत्र च केवलज्ञानं प्राप्तवान्? फाल्गुनमासस्य कृष्णपक्षे एकादश्यां तिथौ प्रयागराजे अक्षयवटवृक्षस्य अधः केवलज्ञानं प्राप्तवान्।
(हिन्दी: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को प्रयागराज में अक्षयवट वृक्ष के नीचे उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ।)
(च) जनानां मार्गदर्शनार्थं कं क्रमं रचितवान्? भिक्षुः, भिक्षुणी, श्रावकः, श्राविका इति क्रमं रचितवान् — स एव जैनसङ्घः इति प्रसिद्धः।
(हिन्दी: भिक्षु, भिक्षुणी, श्रावक, श्राविका — यह क्रम बनाया, जो जैन संघ के नाम से प्रसिद्ध है।)
३. समस्तपदानि (विग्रहवाक्यम् → समस्तपदम्)
| विग्रहवाक्यम् | समस्तपदम् |
|---|---|
| (क) महान् च असौ राजा च | महाराजः |
| (ख) प्रजानां सुखम् | प्रजासुखम् |
| (ग) मूलाः समस्याः | मूलसमस्याः |
| (घ) भोजनस्य निर्माणम् | भोजननिर्माणम् |
| (ङ) आर्थिकी स्थितिः | आर्थिकस्थितिः |
| (च) प्राप्तः आनन्दः येन सः | प्राप्तानन्दः (बहुव्रीहिः) |
| (छ) विधिना लिखितम् | विधिलिखितम् |
| (ज) गृहं गृहं प्रति | प्रतिगृहम् |
| (झ) ब्राह्मीनामा लिपिः | ब्राह्मीलिपिः |
४. वाक्यपरिवर्तनम् (कर्मवाच्य → कर्तृवाच्य)
| कर्मवाच्यम् | कर्तृवाच्यम् |
|---|---|
| यथा — जनैः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धम्। | जनाः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धवन्तः। |
| (क) महाराजेन राज्यं समर्पितम्। | महाराजः राज्यं समर्पितवान्। |
| (ख) केनापि तत् न चिन्तितम्। | कोऽपि तत् न अचिन्तयत्। |
| (ग) ऋषभदेवेन दीर्घकालिकः उपवासः कृतः। | ऋषभदेवः दीर्घकालिकम् उपवासम् अकरोत्। |
| (घ) जनैः जीवनपद्धतिः परिवर्तिता। | जनाः जीवनपद्धतिं परिवर्तितवन्तः। |
| (ङ) ऋषभेण योजना कृता। | ऋषभः योजनां कृतवान्। |
५. सन्धिं कुरुत
| पदद्वयम् | सन्धियुक्तपदम् | सन्धिनाम |
|---|---|---|
| (क) इति + अतः | इत्यतः | यण् सन्धिः |
| (ख) च + इति | चेति | यण् सन्धिः |
| (ग) देवस्य + अपि | देवस्यापि | दीर्घ सन्धिः |
| (घ) तथा + एव | तथैव | वृद्धि सन्धिः |
| (ङ) इति + एतादृशाः | इत्येतादृशाः | यण् सन्धिः |
| (च) ब्राह्मीद्वारा + एव | ब्राह्मीद्वारैव | वृद्धि सन्धिः |
| (छ) प्रस्थितः + अयम् | प्रस्थितोऽयम् | विसर्ग सन्धिः |
नोट: कुछ उत्तर (विशेषतः समास एवं वाच्य-परिवर्तन के) व्याकरणिक दृष्टि से एकाधिक ढंग से भी सही हो सकते हैं। कृपया अपनी पाठ्यपुस्तक/शिक्षक की आधिकारिक उत्तर-कुंजी से मिलान अवश्य करें।



