चतुर्थः पाठः — न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Class 9th Sanskrit Chapter 4 Question Answer न खलु वयस्तेजसो हेतुः
भाग २: प्रश्नोत्तर (अभ्यासाद् जायते सिद्धिः)
प्रश्न १ — पूर्ण वाक्यों में उत्तर
(क) खुदीरामस्य जन्म कुत्र अभवत्? सं.: खुदीरामस्य जन्म बङ्गप्रान्तस्य मेदिनीपुरनामके जनपदे मोहोबनी-ग्रामे अभवत्। हिं.: खुदीराम का जन्म बंगाल प्रांत के मेदिनीपुर जिले के मोहोबनी गाँव में हुआ।
(ख) खुदीरामः किमर्थं व्यथितः भवति स्म? सं.: सः देशवासिषु जायमानान् अत्याचारान् दृष्ट्वा व्यथितः भवति स्म। हिं.: वे देशवासियों पर हो रहे अत्याचार देखकर दुखी होते थे।
(ग) सत्येन्द्रनाथः किम् उपदिष्टवान्? सं.: सत्येन्द्रनाथः उपादिशत् यत् क्रान्तिकार्यं कर्तुं शरीरं वज्रसदृशं दृढं, बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा, मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत् इति। हिं.: सत्येन्द्रनाथ ने उपदेश दिया कि क्रान्तिकार्य करने के लिए शरीर वज्र-सा दृढ़, बुद्धि तलवार की धार-सी तीक्ष्ण और मन गंगाजल-सा निर्मल होना चाहिए।
(घ) खुदीरामः कदा पर्यन्तं पादत्राणं न धरिष्यामि इति प्रतिज्ञातवान्? सं.: यावत् भारतम् आङ्ग्लशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् पर्यन्तं पादत्राणं न धरिष्यामि इति सः प्रतिज्ञातवान्। हिं.: जब तक भारत अंग्रेजी शासन से मुक्त नहीं होगा, तब तक जूते नहीं पहनूँगा — ऐसी प्रतिज्ञा उन्होंने की।
(ङ) किमर्थं न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः? सं.: राष्ट्रभक्तस्य खुदीरामस्य मुखे भयं दुःखं वा न आसीत्, प्रत्युत प्रसन्नता, शान्तिः, तृप्तिः, तेजः च आसीत् — तत् दृष्ट्वा ते चकिताः जाताः। हिं.: देशभक्त खुदीराम के चेहरे पर भय या दुःख नहीं, बल्कि प्रसन्नता, शांति, संतोष और तेज था — यह देखकर वे चकित रह गए।
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📞 सम्पर्क करें: 8290601516प्रश्न २ — सत्य/असत्य
| वाक्य | उत्तर |
|---|---|
| देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति। | सत्यम् |
| निर्दयः किङ्ग्ज़फोर्ड् बालान् अपि दण्डयति स्म। | सत्यम् |
| खुदीरामस्य आक्रमणेन किङ्ग्ज़फोर्ड् मृतः। | असत्यम् (किंग्सफोर्ड नहीं मरा, केनेडी की पत्नी-पुत्री मरीं) |
| खुदीरामः किङ्ग्ज़फोर्ड्महोदयस्य रथस्य उपरि विस्फोटकं क्षिप्तवान्। | सत्यम् |
| खुदीरामः बालानां सङ्घटनं कृत्वा पदयात्राम् आयोजयति स्म। | सत्यम् |
प्रश्न ३ — वर्षों का मिलान
| प्रश्न | उत्तर वर्ष |
|---|---|
| (क) सप्तचत्वारिंशदधिक-नवदशशततमं वर्षम् | १९४७ (३) |
| (ख) अष्टाधिक-नवदशशततमं वर्षम् | १९०८ (४) |
| (ग) पञ्चाशदुत्तर-नवदशशततमं वर्षम् | १९५० (५) |
| (घ) पञ्चाधिक-नवदशशततमं वर्षम् | १९०५ (१) |
| (ङ) नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमं वर्षम् | १८८९ (२) |
प्रश्न ४ — चित्र देखकर वाक्य (उदाहरण-उत्तर)
(दिए गए शब्द: उद्यानं, गृहाणि, पक्षिणः, पुष्पाणि, स्वच्छता, द्विचक्रिका, पर्वतः, वृक्षाः, सूर्यः, मेघाः)
(क) उद्याने बालकाः फुटबॉल-क्रीडां कुर्वन्ति। (ख) एकः बालकः द्विचक्रिकया गच्छति। (ग) आकाशे पक्षिणः उड्डयन्ते, मेघाः च सन्ति। (घ) उद्यानस्य पार्श्वे पर्वतः वृक्षाः च सन्ति। (ङ) एका बालिका चक्रासनेन (व्हील-चेयर) उपविश्य क्रीडां पश्यति।
(हिंदी: यह चित्र-आधारित रचनात्मक प्रश्न है, इसलिए उत्तर उदाहरण-स्वरूप दिए गए हैं — आप चित्र देखकर अपने शब्दों में भी लिख सकते हैं।)
प्रश्न ५ — संधि-विच्छेद
| शब्द | विच्छेद |
|---|---|
| इत्यादयः | इति + आदयः |
| सर्वेऽपि | सर्वे + अपि |
| कश्चित् | कः + चित् |
| प्रत्येकम् | प्रति + एकम् |
| वयस्तेजसः | वयः + तेजसः |
| अचिरादेव | अचिरात् + एव |
प्रश्न ६ — समस्तपद (सामासिक शब्द)
| विग्रह | समस्तपद |
|---|---|
| देशस्य भक्ताः | देशभक्ताः |
| बालः च क्रान्तिवीरः च | बालक्रान्तिवीरः |
| वज्रेण सदृशम् | वज्रसदृशम् |
| असेः धारा | असिधारा |
| मृत्युः एव दण्डः | मृत्युदण्डः |
| न साधारणः | असाधारणः |
| निर्गता दया यस्मात् सः | निर्दयः |
प्रश्न ७ — भूतकाल में परिवर्तन
| मूल वाक्य | परिवर्तित रूप |
|---|---|
| वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः भवन्ति स्म। (लङ्-लकारः) | वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः अभवन्। |
| सत्येन्द्रनाथः खुदीरामम् उपादिशत्। (क्तवतु-प्रत्ययः) | सत्येन्द्रनाथः खुदीरामम् उपदिष्टवान्। |
| सः नवमीं कक्षां पूर्णां कर्तुं न शक्तवान्। (लङ्-लकारः) | सः नवमीं कक्षां पूर्णां कर्तुं न अशक्नोत्। |
| क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कम् अजनयन्। (स्म) | क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कं जनयन्ति स्म। |
| प्रफुल्लः भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारं कृतवान्। (लङ्-लकारः) | प्रफुल्लः भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारम् अकरोत्। |
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(दिए गए शब्द: कश्चित्, काचित्, किञ्चित्, कुत्रचित्, कदाचित्)
| मूल वाक्य | पूर्ण वाक्य |
|---|---|
| बालकः गच्छति। | कश्चित् बालकः गच्छति। |
| बालिका गच्छति। | काचित् बालिका गच्छति। |
| फलं खादतु। | किञ्चित् फलं खादतु। |
| लेखनी लुप्ता। | लेखनी कुत्रचित् लुप्ता। |
| सः आगच्छेत्। | सः कदाचित् आगच्छेत्। |
नोट: पृष्ठ ४८-५० के “स्वाध्यायान्मा प्रमदः” वाले युगल-अव्यय-पद (यत्…इति, यदा…तदा, यावत्…तावत्, यद्यपि…तथापि आदि) भरने वाले अभ्यास तथा “यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्” वाले परियोजना-कार्य (क्रान्तिवीरों की जीवनी लिखना, स्वयं की जन्म-तिथि संस्कृत में लिखना आदि) व्यक्तिगत/परियोजना-आधारित प्रश्न हैं। यदि इनके भी नमूना-उत्तर चाहिए तो बताइए, वे भी बना दूँगा।



