कक्षा 9 संस्कृत – अध्याय 8
जटायोः शौर्यम् (Jatāyoḥ Shauryam)
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कक्षा 9 संस्कृत का अध्याय जटायोः शौर्यम् रामायण से लिया गया है और इसमें पक्षिराज जटायु की वीरता का वर्णन है। जब रावण सीता का अपहरण कर रहा था, तब वृद्ध जटायु ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना रावण से युद्ध किया। यह अध्याय छात्रों को धर्म, साहस और बलिदान का अद्भुत उदाहरण सिखाता है। CBSE बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें संस्कृत श्लोकों का भावार्थ, व्याकरण और नैतिक शिक्षा तीनों ही शामिल हैं।
संस्कृत श्लोक एवं हिन्दी अनुवाद
तं शब्दमवसुप्तस्तु जटायुरथ शुश्रुवे। निरीक्ष्य रावणं क्षिप्रं वैदेहीं च ददर्श सः।
👉 हिन्दी अनुवाद: सोए हुए जटायु ने सीता का करुण क्रन्दन सुना। उन्होंने शीघ्र ही रावण को देखा और उसके साथ वैदेही (सीता) को भी देखा।
ततः पर्वतशृङ्गभस्तीक्ष्णतुण्डः खगोत्तमः। वनस्पतिगतः श्रीमान्व्याजहार शुभां गिरम्।
👉 हिन्दी अनुवाद: तब पर्वत शिखर की तरह शोभायुक्त, तीखी चोंच वाला, वृक्ष पर स्थित, पक्षियों में श्रेष्ठ जटायु ने शुभ वाणी कही।
निवर्तय मतिं नीचां परदाराभिमर्शनात्। न तत्समाचरेद्धीरो यत्परोऽस्य विगर्हयेत्।
👉 हिन्दी अनुवाद: पराई स्त्री के स्पर्शदोष से अपनी नीच बुद्धि को हटाओ। बुद्धिमान व्यक्ति वह आचरण नहीं करता जिससे लोग उसकी निंदा करें।
वृद्धोऽहं त्वं युवा धन्वी सरथः कवची शरी। न चाप्यादाय कुशली वैदेहीं मे गमिष्यसि।
👉 हिन्दी अनुवाद: मैं वृद्ध हूँ और तुम युवा, धनुषधारी, रथयुक्त, कवचधारी हो। फिर भी मेरे रहते तुम सीता को नहीं ले जा सकोगे।
तस्य तीक्ष्णनखाभ्यां तु चरणाभ्यां महाबलः। चकार बहुधा गात्रे व्रणान् पतगसत्तमः।
👉 हिन्दी अनुवाद: उस महाबली पक्षिराज ने अपने तीखे नाखूनों और पैरों से रावण के शरीर पर अनेक घाव कर दिए।
ततोऽस्य सशरं चापं मुक्तामणिविभूषितम्। चरणाभ्यां महातेजा बभञ्ज पतगेश्वरः।
👉 हिन्दी अनुवाद: तब उस महातेजस्वी पक्षिराज ने रावण के रत्नजटित धनुष को पैरों से तोड़ दिया।
स भग्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथि। तलेनाभिजघानाशु जटायुं क्रोधमूर्च्छितः।
👉 हिन्दी अनुवाद: धनुष टूट जाने पर, रथ, घोड़े और सारथी नष्ट होने पर, क्रोध से उन्मत्त रावण ने तलवार की मूठ से जटायु पर प्रहार किया।
जटायुस्तमतिक्रम्य तुण्डेनास्य खगाधिपः। वामबाहून् दश तदा व्यपाहरदरिन्दमः।
👉 हिन्दी अनुवाद: तब पक्षिराज जटायु ने अपनी चोंच से रावण की बाईं ओर की दस भुजाओं को नष्ट कर दिया।
अध्याय का सार
- जटायु ने सीता की रक्षा हेतु रावण से युद्ध किया।
- वृद्धावस्था में भी उन्होंने धर्म की रक्षा का संकल्प निभाया।
- उन्होंने रावण के रथ, घोड़े, सारथी और धनुष को नष्ट कर दिया।
- अंततः रावण ने उन्हें घायल कर दिया, परन्तु जटायु ने वीरता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
Conclusion
जटायोः शौर्यम् अध्याय छात्रों को यह सिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए साहस और बलिदान आवश्यक है। जटायु ने वृद्धावस्था में भी अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर सीता की रक्षा का प्रयास किया। CBSE बोर्ड के छात्रों के लिए यह अध्याय न केवल संस्कृत भाषा की समझ को गहरा करता है, बल्कि जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। Convex Classes Jaipur छात्रों को इस अध्याय का पूर्ण हिन्दी अनुवाद, व्याकरणिक विश्लेषण और परीक्षा‑उपयोगी नोट्स प्रदान करता है ताकि वे बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर सकें।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1. जटायु ने रावण को क्या उपदेश दिया?
👉 जटायु ने कहा कि पराई स्त्री का अपहरण अधर्म है और बुद्धिमान व्यक्ति ऐसा कार्य नहीं करता जिससे उसकी निंदा हो।
Q2. जटायु ने रावण के रथ को कैसे नष्ट किया?
👉 जटायु ने अपने तीखे नखों और पैरों से घोड़ों व सारथी को घायल कर दिया और धनुष तोड़ दिया।
Q3. जटायु की वीरता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
👉 धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देना ही सच्चा साहस है।
Q4. ‘निरीक्ष्य’ शब्द किस धातु से बना है?
👉 ‘निरीक्ष्य’ शब्द ‘ईक्ष्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है देखना।
Q5. ‘वृद्धोऽहम्’ में कौन सा समास है?
👉 ‘वृद्धः अहम्’ = बहुव्रीहि समास।



