Class 10 Sanskrit Chapter 10 Question Answer
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Class 10 Sanskrit Chapter 10 Question Answer

by | Aug 27, 2025 | 0 comments

✨ पाठ परिचय

“अन्योक्तयः” का अर्थ है अप्रत्यक्ष शैली में कही गई बातें। इस पाठ में कवि ने प्रतीकों के माध्यम से जीवन के गूढ़ सत्य, कर्तव्य, कृतज्ञता और संवेदनशीलता को दर्शाया है। राजहंस, तालाब, वृक्ष, मछली, बादल आदि के माध्यम से मानवीय गुणों को उजागर किया गया है।

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📚 प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरं लिखत

(क) कस्य शोभा पर्णं गहनं च भवति?

👉 उत्तर: राजहंसस्य

(ख) सरसः तीरे के वसन्ति?

👉 उत्तर: बकसहस्राणि

(ग) कः पिपीलिकाः गृणाति?

👉 उत्तर: माली

(घ) के स्रालमृदुलानि समाश्रयन्ते?

👉 उत्तर: दीनमीनाः

(ङ) अधःमूलाः कुत्र सन्ति?

👉 उत्तर: तरोः

📚 प्रश्न 2: संस्कृतभाषायां उत्तराणि लिखत

(क) सरसः शोभा कं भवति?

👉 उत्तर: राजहंसेन

(ख) चालकः किं कर्म करोति?

👉 उत्तर: वाहनं चलयति

(ग) मीनः कदा स्वं गीतं प्रगायति?

👉 उत्तर: सुखे समये

(घ) कानि पुष्पाणां दलाः सिक्ताः भवन्ति?

👉 उत्तर: जलदेन

(ङ) दृष्ट्वा: सुखाय के आगच्छन्ति?

👉 उत्तर: पक्षिणः

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📘 प्रश्न 3: समास पहचान एवं विश्लेषण

(क) मालाकारः तोयेः तपेः पुष्टिं करोति।

👉 समास: कर्मधारय (माला बनाने वाला)

(ख) ध्रुवः सान्द्रस्नेहवाली समभ्यस्तेन।

👉 समास: बहुव्रीहि (जिसमें गाढ़ा स्नेह हो)

(ग) पद्मः अक्षरसंपदा आभोगित।

👉 समास: तत्पुरुष (अक्षरों की संपत्ति)

(घ) जलदः नानानन्दरसतानीं पूरयित्वा विलसति।

👉 समास: द्वंद्व (विविध आनंद रसों की धारा)

(ङ) चान्दः वर्णे वर्तति।

👉 समास: कर्मधारय (चंद्र के समान वर्ण)

📘 प्रश्न 4: श्लोकों का भावार्थ

(अ) तोयेऽपि सन्निधाय वारिदान।

👉 भावार्थ: जल का सदुपयोग करना चाहिए। केवल बादलों द्वारा जल देना पर्याप्त नहीं, बल्कि मानवकृत क्रियाओं द्वारा सुसंस्कृत जल का अर्पण श्रेष्ठ है।

  • (आ) रे चालनं सुकृतिनां हि नः।

👉 भावार्थ: हे सज्जनों! हमें अच्छे कार्यों की ओर अग्रसर होना चाहिए। सुकृत ही समाज में सुख-शांति लाते हैं।

📘 प्रश्न 5: रिक्त स्थान पूर्ति

ओषधेः सात्म्यबुद्धिगुणैः कर्मणि गामिन्युपयुक्तिः।

सात्म्ययुक्त औषधि ही कर्म में उपयुक्त होती है, जब उसमें बुद्धि और गुणों का समन्वय हो।

आशायाः उद्देशभवबुद्धिगुणैः स्नेहं त्ववाप्नोति श्रीः।

उद्देश्यपूर्ण बुद्धि और गुणों से युक्त आशा ही स्नेह प्राप्त करती है और श्री (संपन्नता) को प्राप्त करती है।

📘 प्रश्न 6: समास एवं संधि अभ्यास

(i) समास निर्माण

  • अन्य + उत्तरः = अन्योत्तरः
  • निपातन + न्यायेन = निपातन्यायेन
  • कृत + उपकारः = कृतोपकारः
  • तपनीय + धातवः = तपनीयधातवः
  • तव + उत्तमा = तवोत्तमा
  • न + एषा त्वष्टा = नेषा त्वष्टा

(ii) संधि संयोजन

  • पिपासितः + अपि = पिपासितोऽपि
  • कोपः + अपि = कोपोऽपि
  • दिनः + अपि = दिनोऽपि
  • मीनः + अप्यम् = मीनोऽप्यम्
  • सर्वे + अपि = सर्वेऽपि

(iii) शब्द रूपांतरण

  • सरसः + भवेत् = सरसत्वे भवेत्
  • रमा: + मानी = रमामानी
  • मानी + नु = मानिनु

📘 प्रश्न 7: समस्तपद निर्माण

उदाहरण: पीतं च तत् पटम् → पीतपटम्

(क) राजा च असौ पटः → राजपटः

(ख) भीमः च असौ भ्रातः → भीमभ्राता

(ग) अक्षरम् एव पुस्तकम् → अक्षरपुस्तकम्

(घ) उत्तमम् च इदम् ग्रन्थः → उत्तमग्रन्थः

(ङ) साधारणं च तत् मन्दिरम् → साधारणमन्दिरम्

📘 प्रश्न 8: संधि एवं समास मिश्र अभ्यास

(क) मुनिः + अपि → मुनिरपि

(ख) तोयेः + अर्द्रः → अर्द्रतोयः

(ग) अर्स्यः + अपि → अर्स्यापि

(घ) तरुः + अपि → तरुरपि

(ङ) दर्शनीया + दर्शनीया → दृष्टिर्दर्शनीया

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अनुच्छेद लेखन – अन्योक्तयः विषयक सारांश

अन्योक्तयः पाठ अप्रत्यक्ष शैली में जीवन के सत्य को दर्शाता है। राजहंस, तालाब, वृक्ष, मछली आदि प्रतीकों द्वारा कर्तव्य और कृतज्ञता का बोध कराया गया है। राजहंस सरोवर का उपकार कृत्य से चुकाने का प्रयास करता है। माली थोड़े जल से वृक्ष की पुष्टि करता है, परंतु वर्षा उसे नहीं कर पाती। यह पाठ हमें बताता है कि सच्चा उपकार कर्म से ही चुकाया जा सकता है।

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