पाठ परिचय: विचित्रः साक्षी
यह पाठ एक निर्धन व्यक्ति की न्यायिक यात्रा को दर्शाता है, जिसमें एक पक्षी की सहायता से न्यायाधीश बंकिमचन्द्र वास्तविक चोर का पता लगाते हैं। यह कहानी बुद्धिमत्ता, सत्य और न्याय की महत्ता को उजागर करती है।

प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरं लिखत
प्रश्न: नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए।
उत्तर:
- कीदृशे प्रदेशे पदयात्रा न सुखावहा? → विजने
- अतिथिः केन प्रबुद्धः? → चौरस्य पादध्वनिना
- कृशकायः कः आसीत्? → अभियुक्तः
- न्यायाधीशः कस्मै कारागारदण्डम् आदिष्टवान्? → आरक्षिणे
- कं निकषा मृतशरीरम् आसीत्? → राजमार्गम्
प्रश्न 2: संस्कृत में उत्तर लिखिए
प्रश्न: अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत—
(क) निर्धनः जनः कथं वित्तम् उपार्जितवान्?
👉 निर्धनः जनः भूरि परिश्रम्य किंचित् वित्तम् उपार्जितवान्।
(ख) जनः किंश्चित् पदार्थं गच्छति?
👉 जनः पतातिव्रतं गन्तुं प्रस्थितवान्।
(ग) प्रस्तुतं निबन्धकारः किं नाम अचिन्तयत्?
👉 प्रस्तुतं निबन्धकारः अचिन्तयत् यः विजने प्रदेशे पदयात्रा न शुभा।
(घ) वस्तुतः चौरः कः आसीत्?
👉 वस्तुतः चौरः आरक्षी एव आसीत्।
(ङ) जनान् कन्देन निःशङ्कं निरीक्ष्य किंबुद्धम्?
👉 जनान् कन्देन निःशङ्कं निरीक्ष्य न्यायाधीशः चौरं बोधितवान्।
(च) मातिविश्वासेनैव दुष्कृतानि कार्याणि कथं साधयन्ति?
👉 मातिविश्वासेनैव दुष्कृतानि कार्याणि लीलया साधयन्ति।
प्रश्न 3: रेखाङ्कितपदाधार्य प्रश्ननिर्माणं कु्रत
प्रश्न: रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न बनाइए—
उत्तर:
(क) प्रातः दृष्ट्वा सः प्रशन्नः।
👉 कदा दृष्ट्वा सः प्रशन्नः?
(ख) करुणायाः गृही तस्याः आश्रयं प्राप्नुवन्ति।
👉 कस्याः आश्रयं प्राप्नुवन्ति?
(ग) चौरस्य पाठमालिनं अदृष्ट्वा प्रभुः।
👉 कस्य पाठमालिनं अदृष्ट्वा प्रभुः?
(घ) न्यायाधीशः बांकिमचन्द्रः आसीत्।
👉 न्यायाधीशः कः आसीत्?
(ङ) स भारतवर्षं कन्देति स्म।
👉 कं कन्देति स्म?
(च) उषः शवं चर्वन् स्थालिपात्रेण।
👉 कस्मिन् स्थालिपात्रेण उषः शवं चर्वन्?

प्रश्न 4: यथार्थेनोपसङ्ग्रहः
प्रश्न: वाक्यांशों में प्रयुक्त पदों का व्याकरणिक विश्लेषण कीजिए—
उत्तर:
(क) “आसौ प्राय उभौ अवलतान्।”
👉 कर्तृपद: उभौ
(ख) “एतं अधिष्ठाय अधुना युध्यस्व तत्त्ववर्षिणाम्”
👉 प्रत्युपपत्तिपद: माम्
(ग) “करुणायाम् गृहीतं तस्य आर्षं प्रार्थयस्व”
👉 प्रत्युपपत्तिपद: तस्य
(घ) “तातोऽसि न मे तत्त्वं उपयाचितुम् आदित्यात्मा”
👉 क्रियापद: उपयाचितुम्
(ङ) “दुःखायोगिनं कर्मिणं”
👉 विशेषणपद: दुःखायोगिनं

प्रश्न 5: संज्ञा/सर्वनामचर्वं च कृत्वा
प्रश्न: नीचे दिए गए शब्दों को उनके मूल संज्ञा या सर्वनाम रूपों में विभाजित कीजिए—
उत्तर:
| संयुक्त शब्द | संज्ञा/सर्वनाम 1 | संज्ञा/सर्वनाम 2 |
|---|---|---|
| (क) पदातिवः | पदातिः | एव |
| (ख) निशाचरः | निशा | चरः |
| (ग) अजीवात्मा | अजीवः | आत्मा |
| (घ) भोजनान्नं | भोजनम् | अन्नम् |
| (ङ) चौर्यं | चौरः | कर्म |
| (च) गृहाध्ययनं | गृहः | अध्ययनम् |
| (छ) लोलुपः | लोलुता | पुरुषः |
| (ज) यथासुखं | यथा | सुखम् |
| (झ) प्रभ्वतिशयः | प्रभुः | अतिशयः |
प्रश्न 6: प्रत्ययानुसारं पदविन्यासः
प्रश्न: प्रत्यय के अनुसार नीचे दिए गए शब्दों को वर्गीकृत कीजिए—
उत्तर:
| प्रत्यय | पद |
|---|---|
| ल्यप् | आदाय, आवेदयन्ति, मुदितः |
| क्त | दृष्टम्, प्रशस्तिः, निर्गमः, समागमः |
| क्तवतु | कृतवन्तः, नीतवान्, पुष्टवान् |
| तृच् | विहारः, प्रतिघः, क्रोधिष्णु, दर्पणीयम् |
प्रश्न 7 (अ): वाक्यानि बहुवचने परिवर्तनम्
प्रश्न: एकवचन वाक्यों को बहुवचन में बदलिए—
उत्तर:
(क) सः बसस्थानं विहाय पतातिव्रतं गन्तुं निश्चयं कृतवान्।
👉 ते बसस्थानं विहाय पतातिव्रतं गन्तुं निश्चयं कृतवन्तः।
(ख) चौरः ग्रामे नियुक्तः। राजपुरुषः आसीत्।
👉 चौराः ग्रामे नियुक्ताः। राजपुरुषाः आसन्।
(ग) चौरं चौरः गृहात् प्रविष्टः।
👉 चौरं चौराः गृहात् प्रविष्टाः।
(घ) चौरं चौरः तं न्यायालयं स्व-स्व-गृहं स्थापितवन्तः।
👉 चौरं चौराः तं न्यायालयं स्व-स्व-गृहेषु स्थापितवन्तः।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह अभ्यास Class 10 Sanskrit के छात्रों को पाठ की समझ, व्याकरणिक कौशल और परीक्षा की तैयारी में पूर्ण रूप से सक्षम बनाता है। EaseEdu की शैली में यह सामग्री:
- NCERT आधारित है
- व्याकरण और शब्द-विज्ञान को स्पष्ट करती है
- प्रश्न निर्माण और उत्तर लेखन में दक्षता बढ़ाती है
- परीक्षा में सफलता के लिए उपयुक्त है

FAQs – convex classes Sanskrit Helpdesk
Q1. “कृतवान्” का बहुवचन रूप क्या है?
👉 कृतवन्तः
Q2. “आसीत्” का बहुवचन रूप क्या है?
👉 आसन्
Q3. “गृहं” को बहुवचन सप्तमी में कैसे लिखा जाता है?
👉 गृहेषु
Q4. प्रत्यय क्या होता है?
👉 शब्दों के अंत में जुड़ने वाले विशेषांश जो अर्थ और रूप बदलते हैं।
Q5. क्या केवल कर्ता पद ही बदलते हैं बहुवचन में?
👉 नहीं, क्रियापद, विशेषण, और सम्बद्ध शब्द भी बदलते हैं।



