पाठ परिचय: विचित्रः साक्षी
अभ्यासः (प्रश्नोत्तर) — संस्कृत एवं हिन्दी
1. एकपदेन उत्तरं लिखत —
1. (क) कीदृशे प्रदेशे पदयात्रा न सुखावहा?
उत्तर (संस्कृत): विजने प्रदेशे।
हिंदी अर्थ: सुनसान प्रदेश में (पदयात्रा सुखद नहीं होती)।
2. (ख) अतिथिः केन प्रबुद्धः?
उत्तर (संस्कृत): चौरस्य पादध्वनिना।
हिंदी अर्थ: चोर के पैरों की आवाज़ से।
3. (ग) कृशकायः कः आसीत्?
उत्तर (संस्कृत): अभियुक्तः।
हिंदी अर्थ: अभियुक्त (वह व्यक्ति) दुबले शरीर वाला था।
4. (घ) न्यायाधीशः कस्मै कारागारदण्डम् आदिष्टवान्?
उत्तर (संस्कृत): आरक्षिणे।
हिंदी अर्थ: सिपाही को।
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💬 Talk to a Counsellor Class 10 • Expert Faculty • Regular Tests • Doubt Support5. (ङ) कं निकषा मृतशरीरम् आसीत्?
उत्तर (संस्कृत): राजमार्गम्।
हिंदी अर्थ: राजमार्ग के पास।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत —
1. (क) निर्धनः जनः कथं वित्तम् उपार्जितवान्?
उत्तर (संस्कृत): निर्धनः जनः भूरि परिश्रम्य वित्तम् उपार्जितवान्।
हिंदी अर्थ: निर्धन व्यक्ति ने बहुत परिश्रम करके धन कमाया।
2. (ख) जनः किमर्थं पदातिः गच्छति?
उत्तर (संस्कृत): सः अर्थकार्श्येन पीडितः आसीत्, अतः पदातिः गच्छति।
हिंदी अर्थ: वह धन की कमी से पीड़ित था, इसलिए पैदल जाता है।
3. (ग) प्रसृते निशान्धकारे स किम् अचिन्तयत्?
उत्तर (संस्कृत): ‘प्रसृते निशान्धकारे विजने प्रदेशे पदयात्रा न शुभावहा’ इति सः अचिन्तयत्।
हिंदी अर्थ: उसने सोचा कि रात्रि का अंधकार फैलने पर सुनसान स्थान में पैदल यात्रा शुभ नहीं है।
4. (घ) वस्तुतः चौरः कः आसीत्?
उत्तर (संस्कृत): वस्तुतः ग्रामस्य आरक्षी एव चौरः आसीत्।
हिंदी अर्थ: वास्तव में गाँव का सिपाही ही चोर था।
5. (ङ) जनस्य क्रन्दनं निशम्य आरक्षी किमुक्तवान्?
उत्तर (संस्कृत): आरक्षी उक्तवान् – ‘रे दुष्ट! त्वया अहं चोरितायाः मञ्जूषायाः ग्रहणाद् वारितः, अतः निजकृत्यस्य फलं भुङ्क्ष्व। अस्मिन् चौर्याभियोगे त्वं वर्षत्रयस्य कारादण्डं लप्स्यसे।’
हिंदी अर्थ: सिपाही ने कहा — ‘रे दुष्ट! तूने मुझे चुराई हुई पेटी लेने से रोका था, इसलिए अपने किए का फल भोग। इस चोरी के आरोप में तुझे तीन वर्ष का कारादंड मिलेगा।’
6. (च) मतिवैभवशालिनः दुष्कराणि कार्याणि कथं साधयन्ति?
उत्तर (संस्कृत): मतिवैभवशालिनः नीतिं युक्तिं च समालम्ब्य दुष्कराणि कार्याणि लीलयैव साधयन्ति।
हिंदी अर्थ: बुद्धि-वैभव से संपन्न लोग नीति और युक्ति का सहारा लेकर कठिन कार्यों को भी खेल-खेल में सिद्ध कर लेते हैं।
3. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —
1. (क) पुत्रं द्रष्टुं सः प्रस्थितः।
प्रश्न (संस्कृत): कं द्रष्टुं सः प्रस्थितः?
हिंदी अर्थ: वह किसे देखने चला?
2. (ख) करुणापरो गृही तस्मै आश्रयं प्रायच्छत्।
प्रश्न (संस्कृत): करुणापरो गृही कस्मै आश्रयं प्रायच्छत्?
हिंदी अर्थ: दयालु गृहस्थ ने किसे आश्रय दिया?
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3. (ग) चौरस्य पादध्वनिना अतिथिः प्रबुद्धः।
प्रश्न (संस्कृत): कस्य पादध्वनिना अतिथिः प्रबुद्धः?
हिंदी अर्थ: किसके पैरों की आवाज़ से अतिथि जागा?
4. (घ) न्यायाधीशः बंकिमचन्द्रः आसीत्।
प्रश्न (संस्कृत): न्यायाधीशः कः आसीत्?
हिंदी अर्थ: न्यायाधीश कौन था?
5. (ङ) स भारवेदनया क्रन्दति स्म।
प्रश्न (संस्कृत): सः कया क्रन्दति स्म?
हिंदी अर्थ: वह किस पीड़ा से रो रहा था?
6. (च) उभौ शवं चत्वरे स्थापितवन्तौ।
प्रश्न (संस्कृत): उभौ शवं कुत्र स्थापितवन्तौ?
हिंदी अर्थ: दोनों ने शव को कहाँ रखा?
4. यथानिर्देशमुत्तरत —
1. (क) ‘आदेशं प्राप्य उभौ अचलताम्’ अत्र किं कर्तृपदम्?
उत्तर (संस्कृत): उभौ
हिंदी अर्थ: ‘उभौ’ कर्तापद है।
2. (ख) ‘एतेन आरक्षिणा अध्वनि यदुक्तं तत् वर्णयामि’ — अत्र ‘मार्गे’ इत्यर्थे किं पदं प्रयुक्तम्?
उत्तर (संस्कृत): अध्वनि
हिंदी अर्थ: ‘अध्वनि’ पद प्रयुक्त हुआ है।
3. (ग) ‘करुणापरो गृही तस्मै आश्रयं प्रायच्छत्’ — अत्र ‘तस्मै’ इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
उत्तर (संस्कृत): अतिथये
हिंदी अर्थ: ‘तस्मै’ सर्वनाम पद अतिथि के लिए प्रयुक्त हुआ है।
4. (घ) ‘ततोऽसौ तौ अग्रिमे दिने उपस्थातुम् आदिष्टवान्’ अस्मिन् वाक्ये किं क्रियापदम्?
उत्तर (संस्कृत): आदिष्टवान्
हिंदी अर्थ: क्रियापद ‘आदिष्टवान्’ है।
5. (ङ) ‘दुष्कराण्यपि कर्माणि’ — अत्र विशेष्यपदं किम्?
उत्तर (संस्कृत): कर्माणि
हिंदी अर्थ: विशेष्य पद ‘कर्माणि’ है।
5. सन्धि/सन्धिविच्छेदं च कुरुत —
| शब्द | सन्धि-विच्छेद | हिंदी |
| (क) पदातिरेव | पदातिः + एव | पैदल ही |
| (ख) निशान्धकारे | निशा + अन्धकारे | रात्रि के अंधकार में |
| (ग) अभि + आगतम् | अभ्यागतम् | आगत/पास आया हुआ |
| (घ) भोजन + अन्ते | भोजनान्ते | भोजन के बाद |
| (ङ) चौरोऽयम् | चौरः + अयम् | यह चोर है |
| (च) गृह + अभ्यन्तरे | गृहाभ्यन्तरे | घर के भीतर |
| (छ) लीलयैव | लीलया + एव | खेल-खेल में ही |
| (ज) यदुक्तम् | यत् + उक्तम् | जो कहा गया |
| (झ) प्रबुद्धोऽतिथिः | प्रबुद्धः + अतिथिः | जागा हुआ अतिथि |
6. प्रत्यय-वर्गीकरण (ल्यप्, क्त, क्तवतु, तुमुन्) —
शब्दाः: परिश्रम्य, उपार्जितवान्, दापयितुम्, प्रस्थितः, द्रष्टुम्, विहाय, प्रविष्टः, आदाय, क्रोशितुम्, नियुक्तः, नीतवान्, निर्णेतुम्, आदिष्टवान्, समागत्य, मुदितः।
| ल्यप् | क्त | क्तवतु | तुमुन् |
| परिश्रम्य | प्रस्थितः | उपार्जितवान् | दापयितुम् |
| विहाय | प्रविष्टः | नीतवान् | द्रष्टुम् |
| आदाय | नियुक्तः | आदिष्टवान् | क्रोशितुम् |
| समागत्य | मुदितः | — | निर्णेतुम् |
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7. (अ) बहुवचने परिवर्तयत —
1. (क) स बसयानं विहाय पदातिरेव गन्तुं निश्चयं कृतवान्।
बहुवचन: ते बसयानं विहाय पदातय एव गन्तुं निश्चयं कृतवन्तः।
हिंदी अर्थ: उन्होंने बस छोड़कर पैदल ही जाने का निश्चय किया।
2. (ख) चौरः ग्रामे नियुक्तः राजपुरुषः आसीत्।
बहुवचन: चौराः ग्रामे नियुक्ताः राजपुरुषाः आसन्।
हिंदी अर्थ: चोर गाँव में नियुक्त राजपुरुष थे।
3. (ग) कश्चन चौरः गृहाभ्यन्तरं प्रविष्टः।
बहुवचन: केचन चौराः गृहाभ्यन्तरं प्रविष्टाः।
हिंदी अर्थ: कुछ चोर घर के भीतर घुसे।
4. (घ) अन्येद्युः तौ न्यायालये स्व-स्व-पक्षं स्थापितवन्तौ।
बहुवचन: अन्येद्युः ते न्यायालये स्व-स्व-पक्षं स्थापितवन्तः।
हिंदी अर्थ: दूसरे दिन उन्होंने न्यायालय में अपना-अपना पक्ष रखा।
7. (आ) कोष्ठकेषु दत्तेषु पदेषु यथानिर्दिष्टां विभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत —
| वाक्य | उत्तर-पद (विभक्ति) |
| (क) सः _____ निष्क्रम्य बहिरगच्छत्। (गृहशब्दे पंचमी) | गृहात् |
| (ख) गृहस्थः _____ आश्रयं प्रायच्छत्। (अतिथिशब्दे चतुर्थी) | अतिथये |
| (ग) तौ _____ प्रति प्रस्थितौ। (न्यायाधिकारिन् शब्दे द्वितीया) | न्यायाधिकारिणम् |
| (घ) _____ चौर्याभियोगे त्वं वर्षत्रयस्य कारादण्डं लप्स्यसे। (इदम् शब्दे सप्तमी) | अस्मिन् |
| (ङ) चौरस्य _____ प्रबुद्धः अतिथिः। (पादध्वनिशब्दे तृतीया) | पादध्वनिना |
— Convex Classes, Jaipur —



