Class 10th Sanskrit Chapter 5 Question Answer - Convex Classes
Class 10th Sanskrit Chapter 5 Question Answer
Home 9 question or answer 9 Class 10th Sanskrit Chapter 5 Question Answer

Class 10th Sanskrit Chapter 5 Question Answer

by | Aug 25, 2025 | 0 comments

यह अध्याय CBSE बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों में शामिल होता है — इसलिए इसे गहराई से समझना बेहद ज़रूरी है।

अभ्यास 1 — एकपदेन उत्तरं लिखत

प्रश्न: मनुष्याणां महान् रिपुः कः?

उत्तर (संस्कृत): मनुष्याणां महान् रिपुः आलस्यम्।

उत्तर (हिन्दी): मनुष्यों का महान् शत्रु आलस्य है।

प्रश्न: गुणी किं वेत्ति?

उत्तर (संस्कृत): गुणी गुणं वेत्ति।

उत्तर (हिन्दी): गुणी व्यक्ति गुण को जानता है।

प्रश्न: केषां सम्पत्तौ च विपत्तौ च महताम् एकरूपता?

उत्तर (संस्कृत): महताम् सम्पत्तौ च विपत्तौ च एकरूपता (भवति)।

उत्तर (हिन्दी): महापुरुषों की सम्पत्ति और विपत्ति में एकरूपता (एक जैसा स्वभाव) होती है।

प्रश्न: पशुना अपि कीदृशः गृह्यते?

उत्तर (संस्कृत): पशुना अपि उदीरितः अर्थः गृह्यते।

उत्तर (हिन्दी): पशु द्वारा भी कहा हुआ अर्थ ग्रहण कर लिया जाता है।

प्रश्न: उदयसमये अस्तसमये च कः रक्तः भवति?

उत्तर (संस्कृत): उदयसमये अस्तसमये च सविता (सूर्यः) रक्तः भवति।

उत्तर (हिन्दी): उदय के समय और अस्त के समय सूर्य लाल होता है।

CLASS 10 BOARD PREPARATION

Want to Score Better in Class 10?

Get expert guidance, structured classes, regular tests and personalised support from Convex Classes.

💬 Talk to a Counsellor Class 10 • Expert Faculty • Regular Tests • Doubt Support

अभ्यास 2 — अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत

प्रश्न: केन समः बन्धुः नास्ति?

उत्तर (संस्कृत): उद्यमेन समः बन्धुः नास्ति।

उत्तर (हिन्दी): उद्यम (परिश्रम) के समान कोई मित्र नहीं है।

प्रश्न: वसन्तस्य गुणं कः जानाति?

उत्तर (संस्कृत): वसन्तस्य गुणं पिकः जानाति।

उत्तर (हिन्दी): वसन्त के गुण को कोयल जानती है।

प्रश्न: बुद्धयः कीदृश्यः भवन्ति?

उत्तर (संस्कृत): बुद्धयः परेङ्गितज्ञानफलाः भवन्ति।

उत्तर (हिन्दी): बुद्धि दूसरे के संकेत को समझ लेने के फल वाली होती है (अर्थात बुद्धिमान इशारे से ही बात समझ जाता है)।

प्रश्न: नराणां प्रथमः शत्रुः कः?

उत्तर (संस्कृत): नराणां प्रथमः शत्रुः देहस्थः क्रोधः अस्ति।

उत्तर (हिन्दी): मनुष्यों का प्रथम शत्रु शरीर में स्थित क्रोध है।

प्रश्न: सुधियः सख्यं केन सह भवति?

उत्तर (संस्कृत): सुधियः सख्यं सुधीभिः सह भवति।

उत्तर (हिन्दी): बुद्धिमानों की मित्रता बुद्धिमानों के साथ ही होती है।

प्रश्न: अस्माभिः कीदृशः वृक्षः सेवितव्यः?

उत्तर (संस्कृत): अस्माभिः फलच्छायासमन्वितः महावृक्षः सेवितव्यः।

उत्तर (हिन्दी): हमें फल और छाया से युक्त बड़े वृक्ष का आश्रय लेना चाहिए।

अभ्यास 3 — अन्वयद्वये रिक्तस्थानपूर्तिं कुरुत

(क)

यः निमित्तम् उद्दिश्य प्रकुप्यति तस्य (निमित्तस्य) अपगमे सः ध्रुवं प्रसीदति। यस्य मनः अकारणद्वेषि अस्ति, (सः) जनः तं कथं परितोषयिष्यति?

हिन्दी अर्थ: जो किसी कारण को लेकर क्रोधित होता है, वह उस कारण के दूर होने पर निश्चय ही प्रसन्न हो जाता है। जिसका मन बिना कारण ही द्वेष करने वाला है, वह व्यक्ति उसे कैसे संतुष्ट करेगा?

(ख)

विचित्रे संसारे खलु किञ्चित् निरर्थकम् नास्ति। अश्वः चेत् धावने वीरः, खरः भारस्य वहने (वीरः) (भवति)।

हिन्दी अर्थ: इस विचित्र संसार में निश्चय ही कुछ भी निरर्थक नहीं है। यदि घोड़ा दौड़ने में श्रेष्ठ है, तो गधा बोझ ढोने में श्रेष्ठ है।

अभ्यास 4 — समानार्थक श्लोकांशों को पाठ से चयन करके लिखत

वाक्यम्पाठ से समानार्थक श्लोकांश
विद्वान् स एव भवति यः अनुक्तम् अपि तथ्यं जानाति।‘अनुक्तमप्यूहति पण्डितो जनः, परेङ्गितज्ञानफला हि बुद्धयः’ (श्लोक 4)
मनुष्यः समस्वभावैः जनैः सह मित्रतां करोति।‘समान-शील-व्यसनेषु सख्यम्’ (श्लोक 6)
परिश्रमं कुर्वाणः नरः कदापि दुःखं न प्राप्नोति।‘आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति॥’ (श्लोक 1)
महान्तः जनाः सर्वदैव समप्रकृतयः भवन्ति।‘संपत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता। उदये सविता रक्तो रक्तश्चास्तमये तथा॥’ (श्लोक 9)

अभ्यास 5 — यथानिर्देशं परिवर्तनं विधाय वाक्यानि रचयत

मूल वाक्यम् (निर्देश)परिवर्तित वाक्यम्
गुणी गुणं जानाति। (बहुवचने)गुणिनः गुणान् जानन्ति।
पशुः उदीरितम् अर्थं गृह्णाति। (कर्मवाच्ये)पशुना उदीरितः अर्थः गृह्यते।
मृगाः मृगैः सह अनुव्रजन्ति। (एकवचने)मृगः मृगेण सह अनुव्रजति।
कः छायां निवारयति? (कर्मवाच्ये)केन छाया निवार्यते?
तेन एव वह्निना शरीरं दह्यते। (कर्तृवाच्ये)सः एव वह्निः शरीरं दहति।

अभ्यास 6 (अ) — सन्धिं/सन्धिविच्छेदं कुरुत

पदानिसन्धि/विच्छेद
न + अस्ति + उद्यमसमःनास्त्युद्यमसमः
तस्य + अपगमेतस्यापगमे
अनुक्तम् + अपि + ऊहतिअनुक्तमप्यूहति
गावः + चगावश्च
न + अस्तिनास्ति
रक्तः + च + अस्तमयेरक्तश्चास्तमये
योजकः + तत्रयोजकस्तत्र
📚
CLASS 10 STUDY SUPPORT

Looking for Class 10 Notes?

Get guidance on important topics, revision material, exam preparation and study resources for your Class 10 journey.

Get Notes →

अभ्यास 6 (आ) — समस्तपदं/विग्रहं लिखत

समस्तपद / विग्रहउत्तर
उद्यमसमःउद्यमेन समः (तृतीया तत्पुरुष)
शरीरे स्थितःशरीरस्थः (सप्तमी तत्पुरुष)
निर्बलःबलेन रहितः / निर्गतं बलं यस्मात् सः
देहस्य विनाशनायदेहविनाशनाय (षष्ठी तत्पुरुष)
महावृक्षःमहान् वृक्षः (कर्मधारय समास)
समानं शीलं व्यसनं येषां तेषुसमानशीलव्यसनेषु (बहुव्रीहि समास)
अयोग्यःन योग्यः (नञ् तत्पुरुष समास)

अभ्यास 7 (अ) — विलोमपदानि पाठात् चित्वा लिखत

शब्दःविलोमपदम् (पाठ से)
प्रसीदतिप्रकुप्यति
मूर्खःसुधीः / पण्डितः
बलीनिर्बलः
सुलभःदुर्लभः
संपत्तौविपत्तौ
अस्तमयेउदये
सार्थकम्निरर्थकम्

अभ्यास 7 (आ) — संस्कृतेन वाक्यप्रयोगं कुरुत

शब्दःवाक्यप्रयोगः (संस्कृत)हिन्दी अर्थ
वायसःवृक्षे वायसः तिष्ठति।पेड़ पर कौआ बैठा है।
निमित्तम्सः निमित्तम् उद्दिश्य क्रुध्यति।वह किसी कारण से क्रोधित होता है।
सूर्यःसूर्यः पूर्वस्यां दिशि उदयति।सूर्य पूर्व दिशा में उदय होता है।
पिकःपिकः मधुरं गायति।कोयल मीठा गाती है।
वह्निःवह्निः काष्ठं दहति।आग लकड़ी को जलाती है।

परियोजनाकार्यम् (Extra: Project Work — मार्गदर्शन)

(क) उद्यमस्य महत्त्वं वर्णयत। पञ्चश्लोकान् लिखत — छात्र उद्यम (परिश्रम) के महत्त्व पर आधारित पाँच श्लोक संकलित कर लिख सकते हैं, जैसे ‘उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः’ आदि। अथवा किसी ऐसी कथा को अपनी भाषा में लिखें जिसमें उद्यम का महत्त्व दर्शाया गया हो (जैसे कोई परिश्रमी किसान/विद्यार्थी की कथा)।

(ख) ‘निमित्तमुद्दिश्य यः प्रकुप्यति ध्रुवं स तस्यापगमे प्रसीदति’ — इस भाव पर आधारित अपने जीवन का कोई अनुभव (यदि हो) अपनी भाषा में लिखें — जैसे किसी कारणवश क्रोधित होना और कारण दूर होते ही सामान्य हो जाना।

🚀 CLASS 10 CRASH COURSE

Exams Are Coming. Are You Ready?

Revise important concepts, strengthen weak topics and prepare smarter with a focused Class 10 crash course.

10th CLASS
✓ Quick Revision ✓ Important Topics ✓ Exam Strategy
💬 Join Crash Course

अतिरिक्त व्याकरण-सामग्री (Extra: Grammar Reference from योग्यताविस्तार)

1. तत्पुरुष समास

समस्तपदम्विग्रहः
शरीरस्थःशरीरे स्थितः
गृहस्थःगृहे स्थितः
मनस्स्थःमनसि स्थितः
तटस्थःतटे स्थितः
कूपस्थःकूपे स्थितः
वृक्षस्थःवृक्षे स्थितः
विमानस्थःविमाने स्थितः

2. अव्ययीभाव समास

समस्तपदम्विग्रहः
निर्गुणम्गुणानाम् अभावः
निर्मक्षिकम्मक्षिकाणाम् अभावः
निर्जलम्जलस्य अभावः
निराहारम्आहारस्य अभावः

3. पर्यायवाचिपदानि (Synonyms)

शब्दःपर्यायाः
शत्रुःरिपुः, अरिः, वैरी
मित्रम्सखा, बन्धुः, सुहृद्
वह्निःअग्निः, अनलः, पावकः
सुधियःविद्वांसः, विज्ञाः, अभिज्ञाः
अश्वःतुरगः, हयः, घोटकः
गजःकरी, हस्ती, दन्ती, नागः, कुञ्जरः
वृक्षःद्रुमः, तरुः, महीरुहः, विटपः, पादपः
सवितासूर्यः, मित्रः, दिवाकरः, भास्करः

4. ‘मन्त्र’ शब्द की व्युत्पत्ति

मन्त्रः — ‘मननात् त्रायते इति मन्त्रः।’ अर्थात् वे शब्द जो सोच-विचार कर बोले जाएँ। वेद का पाठ तीन प्रकार का होता है — छन्दोबद्ध व उच्च स्वर से बोला जाने वाला ‘ऋक्’, गद्यमय व मन्दस्वर में बोला जाने वाला ‘यजुस्’, और छन्दोबद्धता के साथ गेय ‘सामन्’। पंचतन्त्र में इस शब्द का प्रयोग मन्त्रणा, परामर्श, उपदेश तथा गुप्त मन्त्रणा के अर्थ में भी हुआ है।

अतिरिक्त — सम्पूर्ण शब्दार्थाः (Extra: Full Word Meanings)

शब्दःअर्थः
अवसीदतिदुःखी होता है — Feeling hurt
वेत्तिजानता है — Knows
वायसःकौआ — Crow
करीहाथी — Elephant
निमित्तम्कारण — Purpose
प्रकुप्यतिअत्यधिक क्रोध करता है — Gets very angry
ध्रुवंनिश्चित रूप से — Certainly
अपगमेसमाप्त होने पर — At the end
प्रसीदतिप्रसन्न होता है — Appease
अकारणद्वेषि मनःअकारण ही द्वेष करने वाला मन — Mind holding enmity without reason
परितोषयिष्यतिसन्तुष्ट करेगा — Will satisfy
उदीरितःकहा हुआ — Said/told
गृह्यतेप्राप्त किया जाता है — Accepted
हयाःघोड़े — Horses
नागाःहाथी — Elephants
ऊहतिअंदाज़ा लगाता है — Assumes
इङ्गितज्ञानफलासंकेत-ज्ञान रूपी फल वाले — Understood by indications
पण्डितःबुद्धिमान् — Scholar
वह्निःआग — Fire
दहतेजलाता है — Burns
अनुव्रजन्तिपीछे-पीछे जाते हैं — Follows
तुरगाःघोड़े — Horses
सुधियःविद्वान्, मनीषी — Learned people
व्यसनेषुबुरी आदतों में — In addictions
सख्यम्मित्रता — Friendship
सेवितव्यःआश्रय लेने योग्य — Should be taken as a shelter
दैवात्भाग्य से — By luck
निवार्यतेरोका जाता है — Being prevented
अमन्त्रम्मन्त्रहीन — Powerless word
मन्त्रःमनन योग्य/सारवान् — Hymn
मूलम्जड़ — Root
औषधम्दवा, जड़ी-बूटी — Herbal medicine
योजकःजोड़ने वाला — Connector
सवितासूर्य — The sun
खरःगधा — Donkey

Notes prepared by Convex Classes, Jaipur | www.convexclasses.in | WhatsApp: 8290601516

Class 10 Sanskrit Chapter 4 Question Answer

Class 10 Sanskrit Chapter 3 Question Answer

Class 11th Biology Chapter 2 Question Answer

NIOS Is Which Board? 

Difference Between JEE Main and JEE Advanced

NIOS Admission 2026

Search

Recent Blogs