Class 9th Sanskrit Chapter 3 Question Answer | तृतीयः पाठः — आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
प्रश्न १ — प्रश्नों के उत्तर (संस्कृत में)
(क) मातामही कस्य कथां श्रावितवती?
संस्कृत उत्तर: मातामही महात्मनः नामदेवस्य कथां श्रावितवती। हिंदी अर्थ: नानी ने महात्मा नामदेव की कथा सुनाई।
(ख) नामदेवस्य गुरुः नामदेवं किम् अध्यापितवान्?
संस्कृत उत्तर: नामदेवस्य गुरुः विसोबा तम् अध्यापितवान् यत् “ईश्वरः न केवलं मन्दिरे भवति, अपि तु सर्वेषु भूतेषु तस्य निवासो भवति। अतः तस्य सर्वात्मकस्य ईश्वरस्य पूजनं कुरु” इति। हिंदी अर्थ: नामदेव के गुरु विसोबा ने उन्हें सिखाया कि ईश्वर केवल मन्दिर में नहीं, सभी प्राणियों में निवास करता है, अतः उस सर्वव्यापी ईश्वर की पूजा करो।
(ग) नामदेवः कया भावनया धावनं कृतवान्?
संस्कृत उत्तर: नामदेवः करुणाभावनया धावनं कृतवान्। हिंदी अर्थ: नामदेव ने करुणा की भावना से दौड़ लगाई।
(घ) बालकयोः मुखे किमर्थं म्लाने संजाते?
संस्कृत उत्तर: शुनकम् अकारणम् एव ताडितवन्तौ इति अपराधभावनया बालकयोः मुखे म्लाने संजाते। हिंदी अर्थ: कुत्ते को बिना कारण मारने के अपराध-बोध से दोनों बच्चों के चेहरे उदास हो गए।
(ङ) कपिलः माधवी च कं सङ्कल्पं कृतवन्तौ?
संस्कृत उत्तर: कपिलः माधवी च इदं सङ्कल्पं कृतवन्तौ यत् आवां कदापि कस्यापि पीडां न जनयिष्यावः इति। हिंदी अर्थ: कपिल और माधवी ने संकल्प किया कि वे कभी किसी को कष्ट नहीं देंगे।
(च) “तं दृष्ट्वा पाषाणखण्डं स्वीकृत्य मारयितुं धावितवन्तौ” — इस वाक्य में ‘तम्’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ?
संस्कृत उत्तर: ‘तम्’ इति सर्वनामशब्दः शुनकस्य कृते प्रयुक्तः। हिंदी अर्थ: ‘तम्’ शब्द कुत्ते के लिए प्रयुक्त हुआ है।
(छ) कपिलः माधवी च कुत्र गतवन्तौ?
संस्कृत उत्तर: कपिलः माधवी च मातुलगृहं गतवन्तौ। हिंदी अर्थ: कपिल और माधवी मामा के घर गए।
(ज) ‘तौ’ शब्द किस विभक्ति में है?
संस्कृत उत्तर: ‘तौ’ इति शब्दः द्वितीयाविभक्तौ द्विवचने अस्ति। हिंदी अर्थ: ‘तौ’ शब्द द्वितीया विभक्ति के द्विवचन में है।
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📞 सम्पर्क करें: 8290601516प्रश्न २ — भूतकाल में परिवर्तन
| मूल वाक्य | भूतकाल रूप |
|---|---|
| नैवेद्यं विग्रहस्य पुरतः स्थापयति। | नैवेद्यं विग्रहस्य पुरतः स्थापितवान्। |
| नेत्रे निमील्य प्रार्थनायाः आरम्भं करोति। | नेत्रे निमील्य प्रार्थनायाः आरम्भं कृतवान्। |
| गुरुः विसोबा तम् अध्यापयति। | गुरुः विसोबा तम् अध्यापितवान्। |
| अहं शृणोमि। | अहं श्रुतवान्/श्रुतवती। |
| सत्पुरुषाः स्वकर्तृत्वेन जन्म सार्थकं कुर्वन्ति। | सत्पुरुषाः स्वकर्तृत्वेन जन्म सार्थकं कृतवन्तः। |
| नामदेवः शुनकस्य पृष्ठे अनुधावति। | नामदेवः शुनकस्य पृष्ठे अनुधावितवान्। |
(हिंदी में: यहाँ वर्तमानकाल की क्रिया को क्तवतु-प्रत्यय लगाकर भूतकाल बनाया गया है — जैसे हिंदी में “करता है” को “किया” में बदलते हैं।)
प्रश्न ३ — कौन किससे कह रहा है (कः/का — कं/कां प्रति)
| कथन | वक्ता (कः/का) | श्रोता (कं/कां प्रति) |
|---|---|---|
| कथां श्रोतुम् इच्छतः वा? | मातामही | कपिलं माधवीं च |
| अहं श्रुतवती यत्…देवः पाण्डुरङ्गः नृत्यं कृतवान् इति। | माधवी | मातामहीम् |
| किं देवेन सह अपि मित्रता सम्भवति? | कपिलः | मातामहीम् |
| अतः तस्य सर्वात्मकस्य ईश्वरस्य पूजनं कुरु। | विसोबा (गुरुः) | नामदेवम् |
| नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरु। | नामदेवः | पाण्डुरङ्गम् (देवम्) |
| धिक् शुनकम्। | कपिलः | मातामहीम् (प्रति कथयन् शुनकं निन्दति) |
| नामदेवस्य कियत् दुःखं जातं स्यात् खलु? | माधवी | कपिलं (भ्रातरम्) |
| किं घृतपात्रम् आधृत्य? | कपिलः माधवी च | मातामहीम् |
प्रश्न ४ — रेखांकित पदों पर प्रश्न-निर्माण
| मूल वाक्य | प्रश्न |
|---|---|
| देवः नामदेवं परितः भवति स्म। | देवः कं परितः भवति स्म? |
| ईश्वरः सर्वेषु भूतेषु निवसति। | ईश्वरः केषु निवसति? |
| शुनकः आगत्य मुखे रोटिकां धृत्वा धावितवान्। | शुनकः आगत्य मुखे कां धृत्वा धावितवान्? |
| शुनकस्य स्थाने पाण्डुरङ्गः आविर्भूतवान्। | शुनकस्य स्थाने कः आविर्भूतवान्? |
| आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः। | आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति सः कः? |
प्रश्न ५ — घटनाक्रम अनुसार सही क्रम
सही क्रम (हिंदी में समझाया गया):
- नामदेवः मन्दिरं गतवान्। (नामदेव मन्दिर गए)
- नामदेवः नैवेद्यस्थालिकां विग्रहस्य पुरतः स्थापितवान्। (भोग की थाली मूर्ति के सामने रखी)
- नामदेवः मन्त्रम् उच्चार्य श्रद्धया प्रणम्य नेत्रे उद्घाटितवान्। (मन्त्र बोलकर आँखें खोलीं)
- शुनकः शुष्करोटिकाम् अपहृत्य पलायितवान्। (कुत्ता सूखी रोटी लेकर भागा)
- नामदेवः घृतपात्रम् आधृत्य अनुधावितवान्। (नामदेव घी का बर्तन लेकर पीछे दौड़े)
- शुनकस्य स्थाने पाण्डुरङ्गः आविर्भूतवान्। (कुत्ते के स्थान पर पाण्डुरंग प्रकट हुए)
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📞 सम्पर्क करें: 8290601516प्रश्न ८ — समस्तपद (सामासिक शब्द)
| विग्रह | समस्तपद |
|---|---|
| घृतस्य पात्रम्, तत् | घृतपात्रम् |
| पाषाणस्य खण्डः, तम् | पाषाणखण्डम् |
| प्रियः सुहृद् | प्रियसुहृद् |
| उदरे वेदना | उदरवेदना |
| स्वीयः व्यवहारः | स्वीयव्यवहारः |
| जीवनस्य मूल्यानि | जीवनमूल्यानि |
| मातुलस्य गृहम्, तत् | मातुलगृहम् |
| नरेषु रत्नानि इव, तेषाम् | नररत्नानाम् |
| स्वीयं कर्तृत्वम्, तेन | स्वीयकर्तृत्वेन |
| अपराधस्य भावना, तया | अपराधभावनया |
| गुरोः उपदेशः, तम् | गुरूपदेशम् |
| दिने दिने | प्रतिदिनम् |
| राजा ऋषिः इव, तेषाम् | राजर्षीणाम् |
नोट: प्रश्न ६ (पायस/खीर वाला अनुच्छेद — विभक्ति भरना) और प्रश्न ७ (नदी वाली कहानी — क्तवतु प्रत्यय लगाना) मुख्य कहानी से अलग, केवल व्याकरण-अभ्यास के लिए दिए गए अतिरिक्त अनुच्छेद हैं। अगर इनके भी उत्तर चाहिए तो बताइए, वे भी बना दूँगा।



