Class 10 Sanskrit Chapter 6 Question Answer
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Class 10 Sanskrit Chapter 6 Question Answer

by | Aug 25, 2025 | 0 comments

Class 10 Sanskrit Chapter 6: सौहार्दं प्रकृतेः शोभा

षष्ठः पाठः — सौहार्दं प्रकृतेः शोभा (शेमुषी भाग-2, कक्षा 10) — अभ्यास प्रश्नोत्तर (संस्कृत व हिन्दी)

पाठ-परिचय (Extra Info)

यह पाठ हमें बताता है कि आपसी व्यवहार स्नेह और सौहार्द से युक्त होना चाहिए। आज समाज में लोग आत्माभिमानी होकर एक-दूसरे का तिरस्कार करते हैं और स्वार्थ-पूर्ति में लगे रहते हैं। इस नाट्यरूप पाठ में पशु-पक्षियों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि समाज में सभी का समय के अनुसार महत्त्व होता है और सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अतः हमें अपने कल्याण के लिए परस्पर स्नेह और मैत्रीपूर्ण व्यवहार अपनाना चाहिए।

कथासार (नाटक की संक्षिप्त कहानी)

वन में एक सिंह विश्राम कर रहा होता है। वानर उसकी पूँछ खींचकर छेड़ते हैं। सिंह क्रोधित होकर भी उन्हें पकड़ नहीं पाता। यह देखकर वानर, काक, गज, बक, मयूर आदि सभी पशु-पक्षी स्वयं को ‘वनराज’ पद के योग्य समझने लगते हैं और अपनी-अपनी विशेषताएँ गिनाकर एक-दूसरे की निन्दा करते हैं। अन्त में सभी पक्षी मिलकर आत्मश्लाघा से रहित उलूक (उल्लू) को राजा बनाने का निर्णय लेते हैं। इसी समय प्रकृति माता प्रकट होकर सबको समझाती हैं कि सभी प्राणी उसकी सन्तान हैं, सबका अपना-अपना महत्त्व है, और परस्पर सहयोग से ही सबका कल्याण सम्भव है — आपसी कलह से हानि होती है।

अभ्यास 1 — एकपदेन उत्तरं लिखत

प्रश्न: वनराजः कैः दुरवस्थां प्राप्तः?

उत्तर (संस्कृत): वनराजः तुच्छजीवैः दुरवस्थां प्राप्तः।

उत्तर (हिन्दी): वनराज (सिंह) तुच्छ जीवों (वानरों) के कारण दुर्दशा को प्राप्त हुआ।

प्रश्न: कः वातावरणं कर्कशध्वनिना आकुलीकरोति?

उत्तर (संस्कृत): काकः वातावरणं कर्कशध्वनिना आकुलीकरोति।

उत्तर (हिन्दी): कौआ अपनी कर्कश ध्वनि से वातावरण को व्याकुल कर देता है।

प्रश्न: काकचेष्टः विद्यार्थी कीदृशः छात्रः मन्यते?

उत्तर (संस्कृत): काकचेष्टः विद्यार्थी आदर्शच्छात्रः मन्यते।

उत्तर (हिन्दी): काक जैसी चेष्टा (सतर्कता) वाला विद्यार्थी आदर्श छात्र माना जाता है।

प्रश्न: कः आत्मानं बलशालिनं, विशालकायं, पराक्रमिणं च कथयति?

उत्तर (संस्कृत): गजः आत्मानं बलशालिनं, विशालकायं, पराक्रमिणं च कथयति।

उत्तर (हिन्दी): हाथी स्वयं को बलशाली, विशालकाय और पराक्रमी बताता है।

प्रश्न: बकः कीदृशान् मीनान् क्रूरतया भक्षयति?

उत्तर (संस्कृत): बकः वराकान् मीनान् छलेन अधिगृह्य क्रूरतया भक्षयति।

उत्तर (हिन्दी): बगुला बेचारी मछलियों को छल से पकड़कर क्रूरतापूर्वक खा जाता है।

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अभ्यास 2 — अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत

प्रश्न: निःसंशयं कः कृतान्तः मन्यते?

उत्तर (संस्कृत): यः राजा पीड्यमानान् वित्रस्तान् जन्तून् न रक्षति, सः पार्थिवरूपेण निःसंशयं कृतान्तः (यमराजः) मन्यते।

उत्तर (हिन्दी): जो राजा पीड़ित और डरे हुए प्राणियों की रक्षा नहीं करता, वह राजा के रूप में निश्चय ही यमराज के समान माना जाता है।

प्रश्न: बकः वन्यजन्तूनां रक्षोपायान् कथं चिन्तयितुं कथयति?

उत्तर (संस्कृत): बकः कथयति यत् सः शीतले जले बहुकालपर्यन्तम् अविचलः स्थितप्रज्ञ इव स्थित्वा सर्वेषां रक्षायाः उपायान् चिन्तयिष्यति तथा योजनां निर्मीय जन्तुभिः मिलित्वा रक्षोपायान् क्रियान्वितान् कारयिष्यति।

उत्तर (हिन्दी): बगुला कहता है कि वह ठण्डे जल में बहुत देर तक स्थिर, ध्यानमग्न स्थितप्रज्ञ की तरह रहकर सबकी रक्षा के उपाय सोचेगा और योजना बनाकर सभी प्राणियों के साथ मिलकर रक्षा के उपायों को कार्यरूप देगा।

प्रश्न: अन्ते प्रकृतिमाता प्रविश्य सर्वप्रथमं किं वदति?

उत्तर (संस्कृत): अन्ते प्रकृतिमाता प्रविश्य सस्नेहं वदति — ‘भोः भोः प्राणिनः! यूयम् सर्वे एव मे सन्ततयः। कथं मिथः कलहं कुरूथ?’

उत्तर (हिन्दी): अन्त में प्रकृति माता प्रकट होकर सबसे पहले स्नेहपूर्वक कहती हैं — ‘हे प्राणियो! तुम सब मेरी ही सन्तान हो। तुम आपस में कलह क्यों करते हो?’

प्रश्न: यदि राजा सम्यक् न भवति तदा प्रजा कथं विप्लवेत्?

उत्तर (संस्कृत): यदि राजा सम्यक् नेता न भवति तदा प्रजा अकर्णधारा जलधौ नौरिव विप्लवेत्।

उत्तर (हिन्दी): यदि राजा अच्छा नेता न हो, तो प्रजा वैसे ही डूब जाती है जैसे बिना खेवैया के नाव समुद्र में डूब जाती है।

प्रश्न: मयूरः कथं नृत्यमुद्रायां स्थितः भवति?

उत्तर (संस्कृत): मयूरः पिच्छानि उद्घाट्य नृत्यमुद्रायां स्थितः भवति।

उत्तर (हिन्दी): मोर अपने पंख फैलाकर नृत्य की मुद्रा में खड़ा हो जाता है।

प्रश्न: अन्ते सर्वे मिलित्वा कस्य राज्याभिषेकाय तत्पराः भवन्ति?

उत्तर (संस्कृत): अन्ते सर्वे मिलित्वा उलूकस्य राज्याभिषेकाय तत्पराः भवन्ति।

उत्तर (हिन्दी): अन्त में सभी पक्षी मिलकर उल्लू के राज्याभिषेक की तैयारी में लग जाते हैं।

प्रश्न: अस्मिन्नाटके कति पात्राणि सन्ति?

उत्तर (संस्कृत): अस्मिन् नाटके सिंहः, द्वौ वानरौ, काकः, पिकः, गजः, बकः, मयूरः, व्याघ्रचित्रकौ, उलूकः, सर्वे पक्षिणः, प्रकृतिमाता च — एतानि पात्राणि सन्ति।

उत्तर (हिन्दी): इस नाटक में सिंह, दो वानर, कौआ, कोयल, हाथी, बगुला, मोर, बाघ और चीता, उल्लू, सभी पक्षी तथा प्रकृति माता — ये पात्र हैं।

अभ्यास 3 — रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

वाक्यम् (रेखांकित पद)निर्मित प्रश्नः
सिंहः वानराभ्यां स्वरक्षायाम् असमर्थः एवासीत्।सिंहः काभ्यां स्वरक्षायाम् असमर्थः एवासीत्?
गजः वन्यपशून् तुदन्तं शुण्डेन पोथयित्वा मारयति।गजः वन्यपशून् तुदन्तं केन पोथयित्वा मारयति?
वानरः आत्मानं वनराजपदाय योग्यं मन्यते।वानरः आत्मानं कस्मै योग्यं मन्यते?
मयूरस्य नृत्यं प्रकृतेः आराधना।मयूरस्य नृत्यं कस्याः आराधना?
सर्वे प्रकृतिमातरं प्रणमन्ति।सर्वे कां प्रणमन्ति?
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अभ्यास 4 — शुद्धकथनानां समक्षम् ‘आम्’, अशुद्धकथनानां समक्षं ‘न’ इति लिखत

कथनम्उत्तरम्
सिंहः आत्मानं तुदन्तं वानरं मारयति।न (सिंह उसे पकड़ ही नहीं पाता)
का-का इति बकस्य ध्वनिः भवति।न (यह काक की ध्वनि है)
काकपिकयोः वर्णः कृष्णः भवति।आम्
गजः लघुकायः, निर्बलः च भवति।न (गज विशालकाय और बलशाली होता है)
मयूरः बकस्य कारणात् पक्षिकुलम् अवमानितं मन्यते।आम्
अन्योन्यसहयोगेन प्राणिनाम् लाभः जायते।आम्

अभ्यास 5 — समुचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

शब्द-भण्डार: स्थितप्रज्ञः, यथासमयम्, मेध्यामेध्यभक्षकः, अहिभुक्, आत्मश्लाघाहीनः, पिकः

वाक्यम्उत्तरम्
काकः ____ भवति।मेध्यामेध्यभक्षकः
____ परभृत् अपि कथ्यते।पिकः
बकः अविचलः ____ इव तिष्ठति।स्थितप्रज्ञः
मयूरः ____ इति नाम्ना अपि ज्ञायते।अहिभुक्
उलूकः ____ पदनिर्लिप्तः चासीत्।आत्मश्लाघाहीनः
सर्वेषामेव महत्त्वं विद्यते ____।यथासमयम्

अभ्यास 6 — वाच्यपरिवर्तनं कृत्वा लिखत

उदाहरण: क्रुद्धः सिंहः इतस्ततः धावति गर्जति च। → क्रुद्धेन सिंहेन इतस्ततः धाव्यते गर्ज्यते च।

मूल वाक्यम्वाच्यपरिवर्तित वाक्यम्
त्वया सत्यं कथितम्।त्वं सत्यम् अकथयः / कथितवान्।
सिंहः सर्वजन्तून् पृच्छति।सिंहेन सर्वजन्तवः पृच्छ्यन्ते।
काकः पिकस्य संततिं पालयति।काकेन पिकस्य संततिः पाल्यते।
मयूरः विधात्रा एव पक्षिराजः वनराजः वा कृतः।विधाता मयूरम् एव पक्षिराजं वनराजं वा अकरोत्।
सर्वैः खगैः कोऽपि खगः एव वनराजः कर्तुमिष्यते स्म।सर्वे खगाः कमपि खगम् एव वनराजं कर्तुम् ऐच्छन्।
सर्वे मिलित्वा प्रकृतिसौन्दर्याय प्रयत्नं कुर्वन्तु।सर्वैः मिलित्वा प्रकृतिसौन्दर्याय प्रयत्नः क्रियताम्।

अभ्यास 7 — समासविग्रहं समस्तपदं वा लिखत

समस्तपद/विग्रहउत्तरम्समासनाम
तुच्छजीवैःतुच्छाः च ते जीवाः तैःकर्मधारय
वृक्षोपरिवृक्षस्य उपरिषष्ठी तत्पुरुष
पक्षिणां सम्राट्पक्षिसम्राट्षष्ठी तत्पुरुष
स्थिता प्रज्ञा यस्य सःस्थितप्रज्ञःबहुव्रीहि
अपूर्वम्न पूर्वम्नञ् तत्पुरुष
व्याघ्रचित्रकौव्याघ्रः च चित्रकः च तौद्वन्द्व

अतिरिक्त — सम्पूर्ण शब्दार्थाः (Extra: Full Word Meanings)

शब्दःअर्थः
धुनाति/धूनोतिपकड़कर घुमा देता है — Twists
कर्णमाकृष्यकान खींचकर — Pulling ears
तुदन्तितंग करते हैं — Teasing
कलरवम्चहचहाहट को — Birds’ chirping
सन्नपिहोते हुए भी — Even being so
वित्रस्तान्विशेषरूप से डरे हुओं को — Very scared
कृतान्तःजीवन का अन्त करने वाले (यमराज) — God of death
अनृतम्असत्य — Lie
अतिविकत्थनम्डींगे मारना — Brag about
पोथयित्वा मारयिष्यामिक्लेश देकर मार डालूँगा — Kill by torturing
विधूयखींचकर — By dragging
अट्टहासपूर्वकम्ठहाका मारते हुए — With guffaw
विप्लवेतेहडूब सकती है — May sink
जलधौसमुद्र में — In ocean
नौरिवनौका के समान — like a boat
संशीतिलेशस्यज़रा से भी सन्देह की — Slight doubt
करालवक्त्रस्यभयंकर मुख वाले का — Terrible faced
गुह्यमाख्यातिरहस्य कहता है — Tells the secret
मोदध्वम्तुम सब प्रसन्न हो जाओ — Be happy
अगाधजलसञ्चारीगहरे जल में विचरण करने वाला — Who moves in deep water
रोहितःरोहू नामक बड़ी मछली — A big fish
अंगुष्ठोदकमात्रेणथोड़े से जल में — In thumb deep water
शफरीछोटी सी मछली — small fish

अतिरिक्त — पाठ के महत्त्वपूर्ण श्लोक व सूक्तियाँ (Extra: Key Verses with Meaning)

मुख्य सूक्ति

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नीचैरनीचैरतिनीचनीचैः सर्वैः उपायैः फलमेव साध्यम्।

हिन्दी अर्थ: नीच, अनीच, अति नीच अथवा नीच — सभी प्रकार के उपायों से केवल फल को ही सिद्ध करना है (अर्थात स्वार्थी लोग किसी भी तरीके से अपना फल/लाभ प्राप्त करना चाहते हैं)।

पंचतन्त्र-श्लोक (काक द्वारा उद्धृत)

यो न रक्षति वित्रस्तान् पीड्यमाना परैः सदा।
जन्तून् पार्थिवरूपेण स कृतान्तो न संशयः॥

हिन्दी अर्थ: जो राजा सदा दूसरों से पीड़ित और भयभीत प्राणियों की रक्षा नहीं करता, वह राजा के रूप में निःसन्देह यमराज (मृत्यु का देवता) ही है।

काक-पिक श्लोक

काकः कृष्णः पिकः कृष्णः को भेदः पिककाकयोः।
वसन्तसमये प्राप्ते काकः काकः पिकः पिकः॥

हिन्दी अर्थ: कौआ काला है और कोयल भी काली है — दोनों में क्या अन्तर है? परन्तु वसन्त ऋतु आने पर (गाने और बोलने से) पता चल जाता है कि कौन कौआ है और कौन कोयल।

मयूर का श्लोक (राजा के महत्त्व पर)

यदि न स्यान्नरपतिः सम्यङ्नेता ततः प्रजा।
अकर्णधारा जलधौ विप्लवेतेह नौरिव॥

हिन्दी अर्थ: यदि राजा (नेता) अच्छा और उचित मार्गदर्शक न हो, तो प्रजा वैसे ही डूब जाती है, जैसे बिना खेवैया के नाव समुद्र में डूब जाती है।

प्रकृतिमाता का उपदेश — सौहार्द के छह लक्षण

ददाति प्रतिगृह्णाति, गुह्यमाख्याति पृच्छति।
भुङ्क्ते भोजयते चैव षड्-विधं प्रीतिलक्षणम्॥

हिन्दी अर्थ: देना और लेना, रहस्य कहना और पूछना, स्वयं खाना और दूसरों को खिलाना — ये छह प्रकार के व्यवहार सच्चे प्रेम (मित्रता) के लक्षण हैं।

प्रजा-राजा सम्बन्ध

प्रजासुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम्।
नात्मप्रियं हितं राज्ञः, प्रजानां तु प्रियं हितम्॥

हिन्दी अर्थ: प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है, प्रजा के हित में ही राजा का हित है। राजा का अपना प्रिय (व्यक्तिगत हित) हित नहीं है, अपितु प्रजा का प्रिय ही सच्चा हित है।

विनम्रता का महत्त्व

अगाधजलसञ्चारी न गर्वं याति रोहितः।
अङ्गुष्ठोदकमात्रेण शफरी फुर्फुरायते॥

हिन्दी अर्थ: गहरे पानी में विचरण करने वाली बड़ी रोहू मछली कभी घमण्ड नहीं करती, जबकि थोड़े से (अंगूठे भर) पानी में छोटी मछली उछल-कूद मचाती है (अर्थात् छोटे लोग अधिक घमण्ड दिखाते हैं)।

अन्तिम सन्देश

प्राणिनां जायते हानिः परस्परविवादतः।
अन्योन्यसहयोगेन लाभस्तेषां प्रजायते॥

हिन्दी अर्थ: प्राणियों को आपसी विवाद से हानि होती है, जबकि परस्पर सहयोग से उन्हें लाभ प्राप्त होता है।

अतिरिक्त — योग्यताविस्तार की सूक्तियाँ (Extra: Additional Subhashitas)

‘शाण्डिल्यशतकम्’ से उद्धृत निम्नलिखित श्लोक भी इसी भाव की पुष्टि करते हैं कि संसार में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है — सबका अपना-अपना महत्त्व है:

विचित्रे खलु संसारे नास्ति किञ्चित् निरर्थकम्।
अश्वश्चेत् धावने वीरः, भारस्य वहने खरः॥

हिन्दी अर्थ: इस विचित्र संसार में कुछ भी व्यर्थ नहीं है। घोड़ा दौड़ने में श्रेष्ठ है तो गधा बोझ ढोने में श्रेष्ठ है।

महान्तं प्राप्य सद्बुद्धे! संत्यजेन्न लघुं जनम्।
यत्रास्ति सूचिकाकार्यं कृपाणः किं करिष्यति॥

हिन्दी अर्थ: हे सुबुद्धि! बड़े को पाकर छोटे व्यक्ति को मत त्यागो, क्योंकि जहाँ सुई का काम होता है वहाँ तलवार क्या कर सकती है?

विविध प्राणियों से सम्बन्धित सूक्तियाँ

इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरः।
देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत्॥

हिन्दी अर्थ: बुद्धिमान व्यक्ति बगुले की तरह इन्द्रियों को वश में रखकर, देश-काल-बल को समझकर सभी कार्य सिद्ध करे।

काकचेष्टः बकध्यानी श्वाननिद्रः तथैव च।
अल्पाहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पञ्चलक्षणः॥

हिन्दी अर्थ: कौए जैसी सतर्कता, बगुले जैसा ध्यान, कुत्ते जैसी हल्की नींद, अल्पाहार और गृहत्याग — ये पाँच लक्षण एक अच्छे विद्यार्थी के होने चाहिए।

प्राप्तव्यमर्थं लभते मनुष्यो, देवोऽपि तं लङ्घयितुं न शक्तः।
तस्मान्न शोचामि न विस्मयो मे यदस्मदीयं न हि तत्परेषाम्॥

हिन्दी अर्थ: मनुष्य को जो मिलना होता है वह मिलकर ही रहता है, देवता भी उसे टाल नहीं सकते; इसलिए मैं न शोक करता हूँ न आश्चर्य, क्योंकि जो मेरा है वह दूसरों का नहीं हो सकता।

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥

हिन्दी अर्थ: ‘यह अपना है, यह पराया है’ — ऐसी गणना संकुचित मन वालों की होती है। उदार हृदय वालों के लिए तो सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःखभाग्भवेत्॥

हिन्दी अर्थ: सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगल देखें, कोई भी दुखी न हो।

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