Class 10 Sanskrit Chapter 12 Hindi Translation
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Class 10 Sanskrit Chapter 12 Hindi Translation

by | Jul 22, 2025 | 0 comments

पाठ परिचय (Chapter Overview)

अन्योक्ति का अर्थ है अप्रत्यक्ष रूप से किसी गुण की प्रशंसा या दोष की निंदा करना। इस पाठ में 7 श्लोकों के माध्यम से राजहंस, बक, चातक, मेघ, तालाब, मछली, माली आदि के माध्यम से मानव जीवन के नैतिक मूल्यों और कर्तव्यों को दर्शाया गया है।

पूर्ण श्लोक और हिंदी अनुवाद तालिका

Sanskrit Shloka🇮🇳 Hindi Translation
1. एकेन राजहंसेन या शोभा सरसो भवेत्। न सा बकसहस्रेण परितस्तीरवासिना॥एक राजहंस से जो शोभा तालाब को प्राप्त होती है, वह हजारों बगुलों से नहीं होती।
2. भुक्ता मृणालपटली भवता निपीता न्यम्बूनि यत्र नलिनानि निषेवितानि। रे राजहंस! वद तस्य सरोवरस्य, कृत्येन केन भवितासि कृतोपकारः॥हे राजहंस! जहाँ तुमने कमलनाल खाए, जल पिया, कमल का सेवन किया—उस सरोवर का उपकार किस कार्य से चुका सकोगे?
3. तोयैरल्पैरपि करुणया भीमभानौ निदाघे, मालाकार! व्यरचि भवता या तरोरस्य पुष्टिः। सा किं शक्या जनयितुमिह प्रावृषेण्येन वारां, धारासारानपि विकिरता विश्वतो वारिदेन॥हे माली! गर्मी में थोड़े जल से जो वृक्ष की पुष्टि की गई, क्या वह वर्षा के समय बादल द्वारा की जा सकती है?
4. आपेदिरेऽम्बरपथं परितः पतङ्गाः, भृङ्गा रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते। सङ्कोचमञ्चति सरस्त्वयि दीनदीनो, मीनो नु हन्त कतमां गतिमभ्युपैतु॥पक्षी आकाश में उड़ गए, भौंरे आम की मंजरियों में चले गए। हे तालाब! तुम्हारे सूखने पर बेचारा मछली किस दशा को प्राप्त होगी?
5. एक एव खगो मानी वने वसति चातकः। पिपासितो वा म्रियते याचते वा पुरन्दरम्॥एकमात्र स्वाभिमानी पक्षी चातक या तो प्यासा मर जाता है या इन्द्र से ही जल की याचना करता है।
6. आश्वास्य पर्वतकुलं तपनोष्णतप्त मुद्दामदावविधुराणि च काननानि। नानानदीनदशतानि च पूरयित्वा, रिक्तोऽसि यजलद! सैव तवोत्तमा श्रीः॥हे बादल! पर्वतों, वनों और नदियों को तृप्त कर खाली हो जाना ही तुम्हारी श्रेष्ठ शोभा है।
7. रे रे चातक! सावधानमनसा मित्र क्षणं श्रूयताम्। अम्भोदा बहवो भवन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः। केचिद् वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसुधां गर्जन्ति केचिद् वृथा, यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वचः॥हे चातक! ध्यान से सुनो—आकाश में कई बादल होते हैं, पर सभी बरसते नहीं। कुछ धरती को भिगोते हैं, कुछ व्यर्थ गरजते हैं। हर किसी से दीन वचन मत कहो।

छात्रों के लिए अभ्यास बिंदु

  • शब्दार्थ अभ्यास: मृणालपटली, कृत्येन, विकिरता, अभ्युपैतु, पुरन्दरम्
  • संधि-विच्छेद: रिक्तोऽसि = रिक्तः + असि, निपीतान्यम्बूनि = निपीतानि + अम्बूनि
  • समास पहचान: कृतोपकारः (बहुव्रीहि), बकसहस्रेण (तत्पुरुष)
  • लकार अभ्यास: व्यरचि (लङ्), याचते (लट्), अभ्युपैतु (विधिलिं)

अतिरिक्त सामग्री: भावार्थ, संदर्भ, और प्रेरणा

श्लोकों का भावार्थ और संदर्भ

🕉️ श्लोक संख्याभावार्थ📌 संदर्भ और प्रेरणा
1. राजहंस और बकएक गुणी व्यक्ति की उपस्थिति समाज को सुंदर बनाती है, न कि संख्या से।गुणवत्ता बनाम मात्रा की तुलना—विद्वान का महत्व
2. सरोवर का उपकारजिस स्रोत से जीवन मिला, उसका उपकार चुकाना कठिन है।मातृभूमि, संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
3. माली और वृक्षकठिन समय में किया गया छोटा उपकार, बड़े समय की तुलना में अधिक मूल्यवान होता है।सच्ची सेवा का मूल्य संकट में पहचाना जाता है
4. तालाब और मछलीसच्चा मित्र संकट में साथ नहीं छोड़ता।मित्रता की परिभाषा—संकट में साथ निभाना
5. चातक पक्षीस्वाभिमानी व्यक्ति समझौता नहीं करता, चाहे परिणाम कुछ भी हो।आत्मसम्मान और सिद्धांतों पर अडिग रहना
6. बादल की उदारतादूसरों को तृप्त कर स्वयं रिक्त हो जाना ही सच्ची महानता है।निस्वार्थ सेवा और त्याग की महिमा
7. चातक को सलाहहर चमकता बादल बरसता नहीं—हर किसी से उम्मीद करना उचित नहीं।विवेकपूर्ण याचना और आत्मसम्मान की रक्षा

परीक्षा उपयोगी विश्लेषण

  • अन्योक्ति अलंकार: अप्रत्यक्ष रूप से गुण-दोष की अभिव्यक्ति
  • प्रमुख प्रतीक: राजहंस (गुणी व्यक्ति), बक (मूर्खों की भीड़), चातक (स्वाभिमान), मेघ (सेवा), तालाब (सहारा), मछली (वफादार मित्र)
  • प्रश्न संभावनाएँ:
    • “राजहंस और बक के माध्यम से क्या संदेश दिया गया है?”
    • “चातक पक्षी की विशेषता क्या है?”
    • “बादल की शोभा किसे कहा गया है और क्यों?”

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