कक्षा 9 संस्कृत पाठ 2 – स्वर्णकाकः हिंदी अनुवाद | NCERT शेमुषी भाग 1
अध्याय परिचय:
स्वर्णकाकः एक प्रेरणादायक लोककथा है जो म्यांमार देश से ली गई है। यह कहानी हमें लोभ के दुष्परिणाम और त्याग के लाभ सिखाती है। पाठ का मुख्य पात्र है एक सोने के पंखों वाला कौआ, जो एक निर्धन परिवार की मदद करता है।

संस्कृत से हिंदी अनुवाद (शब्दार्थ सहित)
पुरा कस्मिंश्चिद् ग्रामे एका निर्धना वृद्धा स्त्री न्यवसत्।
पहले एक गांव में एक गरीब वृद्धा स्त्री रहती थी।
तस्या: च एका दुहिता विनम्रा मनोहरा चासीत्।
उसकी एक विनम्र और सुंदर बेटी थी।
एकदा माता स्थाल्यां तण्डुलान् निक्षिप्य पुत्रीम् आदिशत्।
एक दिन माँ ने थाली में चावल रखकर बेटी से कहा…
“सूर्यातपे तण्डुलान् खगेभ्यो रक्ष।”
“सूरज की धूप में चावलों को पक्षियों से बचाना।”
किञ्चित् कालादनन्तरम् एको विचित्र: काकः समुड्डीय तस्याः समीपम् अगच्छत्।
कुछ समय बाद एक विचित्र कौआ उड़कर उसके पास आया।
नैतादृशः स्वर्णपक्षो रजतचञ्चु: स्वर्णकाकस्तया पूर्वं दृष्ट:।
ऐसा सोने के पंखों और चाँदी की चोंच वाला कौआ उसने पहले कभी नहीं देखा था।
तं तण्डुलान् खादन्तं हसन्तञ्च विलोक्य बालिका रोदितुमारब्धा।
उसे चावल खाते और हँसते देख लड़की रोने लगी।
“मदीया माता अतीव निर्धना वर्तते।”
“मेरी माँ बहुत गरीब है।”
स्वर्णकाकः प्रोवाच – ‘मा शुचः। सूर्योदयात्प्राग् ग्रामाद्बहि: पिप्पलवृक्षमनु त्वया आगन्तव्यम्। अहं तुभ्यं तण्डुलमूल्यं दास्यामि।’
कौआ बोला – “चिंता मत करो। सूर्योदय से पहले गांव के बाहर पीपल के पेड़ के पास आना। मैं तुम्हें चावल का मूल्य दूँगा।”

इस पाठ से क्या सीखें:
- लोभ से हानि होती है, जबकि त्याग से लाभ।
- सच्चाई और सहानुभूति से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
- कथाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देना संस्कृत साहित्य की विशेषता है।
Class 9th Sanskrit Chapter 1 Hindi Translation
Class 10 Sanskrit Chapter 1 Question Answer



