Class 9 Sanskrit Chapter 4 – सूक्तिमौक्तिकम्
पूरा हिंदी अनुवाद, संक्षिप्त व्याख्या और महत्वपूर्ण शब्दावलि
सूक्तिमौक्तिकम् का शाब्दिक अर्थ है “नीति के मोती”। यह पाठ संस्कृत साहित्य की चुनिंदा श्लोक-सूक्तियों का संग्रह है जो चरित्र, व्यवहार, सत्य, अहिंसा, परस्पर संबंध और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों पर प्रकाश डालती हैं।

श्लोक 1
वृत्तं यत्नेन संरक्षेद् वित्तमेति च याति च। अक्षीणो वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हतः।।
- हिंदी अनुवाद: आचरण (चरित्र) की रक्षा लगनपूर्वक करनी चाहिए। धन आता-जाता रहता है। धन हीन व्यक्ति वास्तव में हीन नहीं होता, पर चरित्रहीन व्यक्ति मर चुका माना जाए।
- व्याख्या: चरित्र का महत्व धन—दौलत से कहीं अधिक है। धन खोने या पाने में क्षीण या अक्षीण होने की भावना क्षणिक होती है, लेकिन चरित्र की हानि जीवन के लिए घातक है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- वृत्तम् – आचरण
- यत्नेन – प्रयासपूर्वक
- वित्तम् – धन
- हतः – नष्ट
श्लोक 2
श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।।
- हिंदी अनुवाद: धर्म का समग्र सार सुनो और समझो। जो कृत्य स्वयं को अप्रिय या प्रतिकूल लगता हो, वह दूसरों पर कभी थोपो मत।
- व्याख्या: यही स्वर्ण नियम है—“जो आप चाहते हो दूसरों से, वैसा ही व्यवहार आप भी करो।’’ आत्मीयता में निहित यह विचार सत्कार्य और सहअस्तित्व की नींव रखता है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- धर्मसर्वस्वम् – धर्म का सार
- प्रतिकूलानि – अप्रिय बातें
- समाचरेत् – आचरण करना
श्लोक 3
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः। तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।।
- हिंदी अनुवाद: मधुर वचन बोलने से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं। इसलिए मीठी वाणी ही उच्चारित करो — बोलने में कोई दरिद्रता नहीं होती।
- व्याख्या: शब्दों का प्रभाव भावों से भी गहरा होता है। कटु वचन मन को चोट पहुंचाते हैं, पर मधुर वाणी संबंधों में मिठास भर देती है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- प्रियवाक्य – मधुर वचन
- तुष्यन्ति – प्रसन्न होते हैं
- दरिद्रता – कमी
श्लोक 4
अहिंसा परमो धर्मः।
- हिंदी अनुवाद: अहिंसा (किसी को कष्ट न पहुँचाना) सर्वोच्च धर्म है।
- व्याख्या: हिंसा के बिना जीवन सम्भव नहीं, क्योंकि हर कर्म का असर होता है। अहिंसा हमें करुणा और सहनशीलता की सीख देती है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- अहिंसा – कष्ट न देना
- परमो – सर्वोच्च
- धर्मः – कर्तव्य
श्लोक 5
विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय। खलस्य साधोर्विपरीतमेतज्ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।।
- हिंदी अनुवाद: दुष्ट (खल) व्यक्ति विद्या को तर्क-वितर्क में, धन को घमंड में और शक्ति को परोपकार में नहीं, परिदमाने (पीड़ा देने) में लगाता है। सज्जन (साधु) व्यक्ति विद्या को ज्ञान-विस्तार में, धन को दान-उपकार में और शक्ति को रक्षा-संरक्षण में लगाता है।
- व्याख्या: साधन (विद्या, धन, शक्ति) एक ही है; उनकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति का स्वभाव कैसा है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- विवादाय – तर्क-वितर्क के लिए
- मदाय – घमंड के लिए
- परिपीडनाय – पीड़ा देने के लिए
- विपरीतम् – विपरीत
- रक्षणाय – रक्षा के लिए
श्लोक 6
सन्तोषः परमं सुखं।
- हिंदी अनुवाद: संतोष (तृप्ति) ही सर्वोच्च सुख है।
- व्याख्या: सामाजिक, भौतिक या मानसिक इच्छाएँ कभी पूर्ण नहीं होतीं। आंतरिक संतोष के बिना बाहरी सुख क्षणभंगुर है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- सन्तोषः – संतोष
- परमं – सर्वोच्च
- सुखं – आनंद
श्लोक 7
सत्यमेव जयते।
- हिंदी अनुवाद: सत्य ही अंततः विजयी होता है।
- व्याख्या: छोटे-से-छोटे झूठ के भी दूरगामी परिणाम होते हैं, पर सत्य की शक्ति अटल और अक्षय है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- सत्यमेव – केवल सत्य
- जयते – विजयी होता है
श्लोक 8
नम्रता शोभते विद्या।
- हिंदी अनुवाद: विद्या (ज्ञान) में नम्रता आकर्षण बढ़ाती है।
- व्याख्या: विद्वता कभी घमंड नहीं बढ़ाती; विनम्रता उस पर मोती की तरह चमक लाती है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- नम्रता – विनम्रता
- शोभते – शोभा लाती है
- विद्या – ज्ञान
श्लोक 9
सत्सङ्गतिः परा प्राप्तिः।
- हिंदी अनुवाद: सज्जनों की संगति सर्वोत्तम प्राप्ति है।
- व्याख्या: अच्छा साथ, मार्गदर्शन और प्रेरणा जीवन में मूल्यवर्धक अनुभव लाता है।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- सत्सङ्गतिः – सज्जनों की संगति
- परा – श्रेष्ठ
- प्राप्तिः – उपलब्धि
श्लोक 10
मित्रं यः प्रियं हितं च।
- हिंदी अनुवाद: जो प्रिय (आपके प्रति स्नेही) और हितकारी (हित में कार्य करनेवाला) हो, वही सच्चा मित्र होता है।
- व्याख्या: सत्यमित्र वह है जो आपके सुख-दु:ख में सहभागी हो और आपके हित की कामना करे।
- महत्वपूर्ण शब्द:
- मित्रम् – मित्र
- प्रियं – स्नेही
- हितं – हितकारी

विस्तृत अवलोकन
- यह दस श्लोक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र—व्यवहार, संबंध, दर्शन और आत्मसंतोष—में नीतिपरक मूल्यों की शिक्षा देते हैं।
- हर श्लोक एक सरल संवाद की तरह है, जिसे युवा छात्र भी आसानी से आत्मसात् कर सीख सकते हैं।
- मनोवैज्ञानिक दृष्टि से मधुर वाणी (श्लोक 3) और संतोष (श्लोक 6) आधुनिक तनाव-नियंत्रण की नींव हैं।
- सामाजिक रूप से सत्य (7), अहिंसा (4) और मित्रता (10) का महत्व हमारे अन्तर्निहित नैतिक तंत्र को पुष्ट करता है।
Class 9th Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation
Class 9th Sanskrit Chapter 2 Hindi Translation



