चतुर्थः पाठः — न खलु वयस्तेजसो हेतुः
(कक्षा ९ शारदा — पूर्ण हिंदी अनुवाद एवं प्रश्नोत्तर)
भाग १: गद्यांश का हिंदी अनुवाद
परिचयात्मक अनुच्छेद: हमने भारतदेश की स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव वर्ष मनाया। क्या हम जानते हैं कि देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए कितने ज्ञात-अज्ञात क्रान्तिवीरों ने स्वतंत्रता-यज्ञ में अपने परिवार और अपने जीवन की आहुति दे दी? विद्यार्थियो! वे सभी क्रान्तिवीर हमारे द्वारा कृतज्ञता की भावना से सदा वन्दनीय हैं। खुदीराम उन्हीं देशभक्तों में से एक तेजस्वी बाल-क्रान्तिवीर शहीद हैं। क्रान्तिवीर खुदीराम के जीवन-वृत्तान्त का संक्षिप्त वर्णन यहाँ किया गया है।
जन्म-परिचय: भारत के स्वतंत्रता-संग्राम के सशस्त्र आंदोलन में बंगाल प्रांत अग्रणी था। उसी बंगाल प्रांत के मेदिनीपुर नामक जिले के मोहोबनी गाँव में सन् १८८९ ई. में दिसंबर महीने की तीसरी तारीख को खुदीराम का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था। खुदीराम के बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया। इसलिए उनकी बड़ी बहन अपरूपा देवी ने ही उनका पालन-पोषण किया। बचपन से ही खुदीराम असाधारण थे। साधारण बच्चों की तरह उनका मन खेल-कूद में नहीं रमता था। वे देशवासियों पर हो रहे अत्याचारों को देखकर दुखी हो जाते थे।
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📞 सम्पर्क करें: 8290601516बंगभंग आंदोलन: बंगाल प्रांत में क्रान्तिवीरों की बड़ी-बड़ी गुप्त गतिविधियों से अंग्रेज भयभीत थे। भारत के तत्कालीन वायसराय कर्ज़न ने बंगाल के इस वीरत्व को दबाने, उत्साह नष्ट करने और देशभक्ति कुचलने के लिए बंगाल प्रांत का धार्मिक आधार पर विभाजन करना निश्चित किया। सन् १९०५ में उसने बंगाल को दो भागों में बाँट दिया। इस कृत्य से न केवल बंगाल में, बल्कि पूरे देश में जन-आंदोलन चल पड़ा, जिसे बंगभंग-आंदोलन कहा गया। यद्यपि उस समय खुदीराम केवल पंद्रह वर्ष के थे, फिर भी देशभक्ति से प्रेरित होकर वे इस आंदोलन में कूद पड़े। अंग्रेजों की जंजीरों से भारतमाता को मुक्त कराना ही उनका संकल्प था, इसलिए वे नौवीं कक्षा भी पूरी नहीं कर पाए — क्योंकि देशभक्तों का जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित होता है।
पदयात्रा और पर्चे बाँटना: बच्चों को संगठित करके वे पदयात्रा आयोजित करते थे, जिसमें देशभक्ति गीत और ‘वन्दे मातरम्’ जैसे नारे लगते थे। वे लोक-जागरण के पर्चे बाँटते थे। एक बार पर्चे बाँटते समय वे अंग्रेजों के हाथ लग गए, लेकिन बलशाली खुदीराम उन्हें पीटकर वहाँ से निकल गए।
गुप्त प्रशिक्षण: बंगाल में क्रान्तिवीरों के गुप्त मंडल अंग्रेजों के मन में आतंक पैदा करते थे। सत्येन्द्रनाथ एक ऐसे ही गुप्त मंडल के संचालक थे। खुदीराम अपने मित्र प्रफुल्ल के साथ जाकर उनसे मिले। सत्येन्द्रनाथ ने उपदेश दिया — “क्रान्तिकार्य के लिए शरीर वज्र-सा दृढ़, बुद्धि तलवार-सी तीक्ष्ण और मन गंगाजल-सा निर्मल होना चाहिए।” दोनों ने आठ महीने का प्रशिक्षण लिया और शीघ्र ही बंदूक चलाने में निपुण हो गए। राणा प्रताप के चरित्र से प्रेरित होकर खुदीराम ने प्रतिज्ञा ली — “जब तक भारत अंग्रेजी शासन से मुक्त नहीं होगा, तब तक मैं जूते नहीं पहनूँगा।”
किंग्सफोर्ड-वध की योजना: कलकत्ता के मुख्य न्यायिक अंग्रेज अधिकारी ‘किंग्सफोर्ड’ भारतीय देशभक्तों को अत्यंत कठोरता से दंड देते थे और बच्चों को भी नहीं छोड़ते थे। जब उनका स्थानांतरण मुज़फ्फरनगर हुआ, तब सशस्त्र क्रान्तिवीर मंडल ने उन्हें मारने का निश्चय किया। इस कार्य का पूरा उत्तरदायित्व प्रफुल्ल और खुदीराम ने लिया तथा वध की योजना भी बनाई।
घटना: २८ अप्रैल १९०८ को किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर प्रफुल्ल-खुदीराम ने बम फेंका। भारी धमाका हुआ, आग की लपटें आकाश तक उठीं। ‘किंग्सफोर्ड मारा गया, हमारा कार्य पूरा हुआ’ — यह सोचकर दोनों भाग गए। लेकिन दुर्भाग्य से वह किंग्सफोर्ड की ही गाड़ी थी, पर उसमें वह नहीं था — केनेडी नामक अधिकारी की पत्नी और पुत्री उसमें थीं, जो मर गईं, जबकि किंग्सफोर्ड बच गया। पूरी रात दोनों भागते रहे, पर दुर्भाग्यवश पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
प्रफुल्ल का बलिदान: वीर प्रफुल्ल का अंग्रेजों से बचने का प्रयास व्यर्थ हुआ। कोई उपाय न देख उन्होंने भारतमाता को मन से प्रणाम कर ‘वन्दे मातरम्’ कहते हुए स्वयं को गोली मार ली और शहीद हो गए।
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📞 सम्पर्क करें: 8290601516खुदीराम का बलिदान: पकड़े गए खुदीराम को न्यायालय ले जाया गया। वहाँ हर प्रश्न का उनका उत्तर था — ‘वन्दे मातरम्’। न्यायाधीश ने निर्दयतापूर्वक बालक खुदीराम को फाँसी की सज़ा सुनाई। देशभक्त खुदीराम के चेहरे पर भय या दुःख नहीं, बल्कि प्रसन्नता, शांति, संतोष और तेज था — यह देखकर न्यायाधीश और अंग्रेज अधिकारी भी चकित रह गए। ११ अगस्त १९०८ को बचपन की आयु में ही देश की स्वतंत्रता के लिए खुदीराम शहीद हो गए। भारतमाता के दर्शन की चाह में वे हँसते हुए, ‘वन्दे मातरम्’ का जाप करते हुए आनंदपूर्वक स्वर्ग सिधार गए।
Class 9th Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation
Class 9th Sanskrit Chapter 2 Hindi Translation



